'मोदी की प्रतिक्रिया पूरी तरह से राजनीतिक'

    • Author, प्रदीप सिंह
    • पदनाम, राजनीतिक विश्लेषक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ ज़किया जाफ़री की याचिका को अदालत के ज़रिए ख़ारिज किए जाने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में अब पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई है.

अहमदाबाद की निचली अदालत के फ़ैसले के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री <link type="page"><caption> नरेंद्र मोदी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/12/131227_narendra_modi_reaction_vk.shtml" platform="highweb"/></link> ने अपने ब्लॉग में प्रतिक्रिया दी है. मोदी ने उन दंगों के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार ठहराए जाने पर दुख व्यक्त किया. जाने माने राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह ने इसे लोकसभा चुनाव से पहले दिया गया राजनीतिक बयान क़रार दिया है.

'राजनीतिक इस्तेमाल'

मोदी की ये प्रतिक्रिया पूरी तरह से एक राजनीतिक बयान है जो ख़ासतौर पर आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दिया गया है.

एक बात सही है कि जितनी मीडिया और न्यायिक जांच गुजरात दंगो को लेकर हुई है उससे पहले किसी दंगे को लेकर नहीं हुई है लेकिन उससे नरेंद्र मोदी या गुजरात सरकार की ज़िम्मेदारी किसी भी तरह कम नहीं हो जाती.

मुझे लगता है कि अगर किसी राज्य में कहीं भी 2-3 घंटे से ज्यादा सांप्रदायिक दंगा चलता है तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं कि या तो वो सरकार निकम्मी है या उस सरकार की दंगों में मिलीभगत है.

<link type="page"><caption> नरेंद्र मोदी ने 2002 के गुजरात दंगों पर चुप्पी तोड़ी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/12/131227_narendra_modi_reaction_vk.shtml" platform="highweb"/></link>

ऐसा लगता है मोदी निचली अदालत के फ़ैसले का चुनाव के दौरान राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहते हैं.

अब अगर ज़किया जाफ़री हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाती हैं और भारत में जिस तरह से न्याय व्यवस्था है हम सभी जानते हैं कि उसमें वक्त लग सकता है. हो सकता है कि चुनाव से पहले हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोई फ़ैसला पक्ष या विपक्ष में नहीं आए.

इसलिए तब तक मोदी ये दावा कर सकते हैं कि अदालत ने उनको बरी कर दिया है और उनके ऊपर जो आरोप लगे थे उनसे उनको मुक्त कर दिया है.

'मोदी की छवि'

हम सभी जानते हैं कि इस देश में हाइकोर्ट का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट और निचली कोर्ट का फ़ैसला हाइकोर्ट बदल सकती है.

इसलिए अभी ये कहना कि इस देश की अदालतों ने ये मान लिया है कि नरेंद्र मोदी की गुजरात दंगों में कोई भूमिका नहीं थी ये सच नहीं है.

देखिए ये एक पूरी तरह से राजनीतिक रणनीति के तहत दिया गया बयान है. पहली बात ये कि अगर आप चाहें तो आप इस प्रतिक्रिया को माफ़ी मान लें कि मोदी बहुत दुःखी थे, जो कुछ हो रहा था उससे वो बहुत परेशान थे, उसकी उनको बहुत चिंता थी, स्थितियां बहुत ख़राब हो गईं थीं. कौन लोग ये कर रहे थे उनका मोदी को कुछ पता नहीं था. लेकिन सरकार के मुखिया होने के नाते मोदी की ज़िम्मेदारी दुःखी होने के अलावा दंगों को रोकने की थी.

दूसरी बात ये कि जो घटना हो गई उसके दोषियों को सज़ा दिलाने की थी. अब ये सरकार और मोदी को ये तय करना पड़ेगा इसमें उनकी भूमिका क्या रही.

रही बात लोगों के बीच मोदी की छवि बदलने की, तो लोगों की सोच मोदी की इस प्रतिक्रिया से बहुत नहीं बदलेगी. मुझे नहीं लगता लोगों की जो धारणा मोदी को लेकर बनी है वो उलट हो जाएगी.

लेकिन किसी संगठन या व्यक्ति के लिए, जो मोदी के साथ आने के लिए किसी बहाने की कोशिश में थे उनके लिए निश्चित रूप से ये एक बहाना है.

मुझे लगता है कि गुजरात दंगों को लेकर मोदी की छवि बदलने वाली नहीं है. ये तो आजीवन नरेन्द्र मोदी के साथ रहेगी.

हम और आप जानते हैं कि अदालत साक्ष्यों के आधार पर फ़ैसला देती है इस आधार पर नहीं कि लोग क्या महसूस करते हैं या जानते हैं. इसलिए लोगों का फ़ैसला, अदालत के फ़ैसले से अलग है.

नरेन्द्र मोदी की छवि इसी बात पर निर्भर करेगी कि लोग मोदी को दोषी मानते हैं या नहीं.

(राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की बातचीत पर आधारित)

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