घर वापसी की बांट जोह रहे हैं दंगा पीड़ित

दंगा पीड़ित कैम्प
    • Author, मनीष कुमार मिश्रा
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

<link type="page"><caption> </caption><url href="" platform="highweb"/></link>राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का एक दल शुक्रवार को मुज़फ़्फ़रनगर के <itemMeta>hindi/india/2013/11/131119_muzaffarnagar_riot_victims_dil</itemMeta> पहुंचा जहां दल के सदस्यों ने वहां रह रहे लोगों से मुलाक़ात की.

कुछ दिन पहले ही यहां रहने वाले 32 बच्चों की ठंड की वजह से मौत हो गई थी.

वहीं उत्तरप्रदेश सरकार यहां के लोगों को सभी तरह की राहत पहुंचाने का दावा कर रही है.

लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दल ने राज्य सरकार के दावों को पर्याप्त नहीं माना है क्योंकि राहत कैम्पों में ठंड से बचने का कोई उम्दा इंतज़ाम सरकार की ओर से नहीं किया गया है.

इसी वजह से आशंका जताई गई है कि ठंड की वजह से और मौतें हो सकती हैं.

घर वापसी की चाह

हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने दंगा पीड़ित सभी लोगों को दस लाख रुपये की सहायता राशि दी है और करीब 58 लोगों को सरकारी नौकरी भी दी जा चुकी है.

जावेद उस्मानी ने ये भी कहा है कि राहत शिविर में रहने वाले परिवारों को किसी भी तरह की तकलीफ़ नहीं होने दी जाएगी.

राहत शिविरों में वो लोग रह रहे हैं जो अक्तूबर में मुज़फ़्फ़रनगर में दो समुदायों के बीच हुई झड़पों की वजह से अपने घरों को छोड़ने पर विवश हो गए थे.

राहत शिविरों में रह रहे लोगों को कहना है कि वे अपने घरों को लौटना चाहते हैं लेकिन अभी चाहकर भी नहीं जा पा रहे हैं.

उनका ये भी कहना है कि कैम्प में उन्हें सरकार की ओर से कोई विशेष सहायता नहीं मिल रही है और ठंड में उन्हें प्लास्टिक से बने घरों में रहने को मजबूर होना पड़ा है.

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