'हमारी नहीं दिल्ली, तो फिर किसी की नहीं'

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दोपहर के तीन बज रहे हैं और पूर्वी दिल्ली के एक बड़े पार्क के बाहर रिक्शे से दो बुज़ुर्ग उतर रहे हैं.
इन दिनों हर रोज़ ये दोपहर का भोजन कर के यहाँ आकर आगामी चुनाव की बनती-बिगड़ती बिसात पर बात करते हैं.
40 वर्षों से दिल्ली में रह रहे प्रकाश सचदेवा और केएम मल्होत्रा अब अपने को दिल्ली का ही मानते हैं, भले ही इनकी पैदाइश पंजाब की हो.
प्रकाश सचदेवा कहते हैं, "हमारी नहीं दिल्ली तो फिर किसी की नहीं".
लेकिन इन्हें इस बात का मलाल है कि राजनीतिक दल पुराने दिल्ली वालों पर अब उतना ध्यान नहीं देते.
बुधवार को दिल्ली विधान सभा की 70 सीटों के लिए मतदान होना है और मौजूदा कांग्रेस सरकार को चुनौती देने वाली पार्टियों में इस बार भाजपा, बसपा, एनसीपी वगैरह के अलावा आम आदमी पार्टी भी है.
किसकी है दिल्ली?

दिल्ली की राजनीति समझने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि दिल्ली वाले कौन-कौन हैं!
पुरानी दिल्ली में सैकड़ों साल से रह रहे बाशिंदे अपने को असली दिल्ली वाला कहते हैं.
दूसरी तरफ़ दिल्ली के बीचोंबीच बसे बेर सराय, नज़फ़गढ़, जसोला, सराय काले खां जैसे सैकड़ों गाँवों के निवासी अपने को दिल्ली का दिल समझते हैं.
एक और तबका है जो वसंत कुंज, द्वारका से लेकर पटपडग़ंज तक के मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स में रह कर नौकरी तो करता है लेकिन पला बढ़ा किसी दूसरे प्रदेश में हैं.
इनमें से अधिकांश के पास अब दिल्ली का पता है और वे यहाँ के मतदाता भी हैं.
लेकिन दिल्ली अगर सभी की है तब क्या इन सब के लिए चुनावी मुद्दे भी एक से हैं?
बात करने पर लगता है सभी की शिकायतें या तकलीफें निजी हैं लेकिन ज़्यादातर को लगता है शहर की राजनीति में उसकी भागेदारी भी कम ही है.
दिलीप घोष 25 वर्ष पहले पश्चिम बंगाल से दिल्ली के श्रीनिवासपुरी में आकर बसे थे और दिल्ली के मिज़ाज से नाराज़ हैं.
उन्होंने कहा, "दिल्ली सभी की है और किसी की भी नहीं. हर चुनाव में मैंने वोट दिया है लेकिन मेरे वोट का तो कोई बड़ा असर नहीं दिखा. तब भी छोटी सी पान-बीड़ी की दुकान थी और आज भी उसी से पेट पालता हूँ. नेता लोग आते हैं, बताते हैं क्या-क्या किया और चले जाते हैं".
परदेस की भावना

जितने लोगों से मिल सका लगभग सभी को दिल्ली की राजनीति में दिलचस्पी है.
हालांकि ज़्यादातर को लगता है कि प्रमुख राजनीतिक दलों में फ़र्क भी बहुत कम ही है.
राम अवतार रहने वाले तो कटिहार, बिहार के हैं लेकिन उनकी रोज़ी-रोटी की तलाश एक दशक पहले दिल्ली के ओखला में आकर ख़त्म हुई.
पेशे से नाई, राम अवतार का मत है कि राजनीतिक दल अपने चुनावी वादे सिर्फ़ अमीरों के लिए करते हैं.
उन्होंने कहा, "चाहे शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनी रहें या हर्षवर्धन नए सीएम बन जाएं, हमारी ज़िंदगी इसी उस्तरे की धार की तरह है. रोज़ आओ, तेज़ करो और शाम को बंद कर दो. वोट देना है, जाकर दे आएँगे".
राम अवतार को लगता है कि इस शहर में उनकी भागीदारी शून्य है और कभी किसी सरकार ने इन जैसों की सुध ही नहीं ली. कभी जानने की कोशिश नहीं की ये लोग कैसे रह रहे हैं, क्या खा रहे हैं, पीने का पानी कितना साफ़ मिल रहा है.
जीना यहाँ, मरना यहाँ

कुछ भी कह लीजिए, दिल्ली की अपनी ही एक रफ़्तार है जिस पर वो रोज़ दौड़ती है.
बहुतों ने यहाँ आकर बहुत खोया भी है और उनसे ज़्यादा ने पाया भी है.
शायद यही वजह है कि जब भी चुनाव निकट होते हैं लोग-बाग सुख-सुविधाओं के बारे में कम और मुश्किलों के बारे में ज़्यादा बात करते हैं.
आतमजीत सिंह से मिलने पांडव नगर पहुंचा तो उन्होंने कहा, "मेरी तस्वीर मेरी सवारी में ही खिंचनी चाहिए".
आतमजीत दिल्ली में पले बढ़े और 1984 में हुए सिख-विरोधी दंगों में शहर छोड़ कर पंजाब चले गए थे.
तीन साल में ही मन उचट गया और वापस लौट आए 'साड्डी दिल्ली' में ऑटो रिक्शा चलाने.
कहते हैं, "हमने तो बड़ी सरकारें देखीं. लेकिन आम आदमी को राजनीति और चुनावों से कुछ नहीं मिलने वाला साहब जी. सभी को चाहिए इसे भूलकर अपनी रोज़ी-रोटी में मन लगाएं, उसी में सबकी भलाई है. हमारे लिए तो दिल्ली ही हमारा और बच्चों का पेट पालती रही है और आगे भी करती रहेगी".
<italic><bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold></italic>












