'बलात्कार' के बाद मेडिकल जांच तक नहीं

- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बड़े शहरों में दुष्कर्म की ख़बरों पर आंदोलन और बहस जारी हैं. इससे अनजान छत्तीसगढ़ की एक लड़की अपने साथ हुए कथित बलात्कार के बाद तीन दिन से अपनी मेडिकल जांच के लिए भटक रही है.
यह लड़की बिलासपुर के एक गांव की है. उसके साथ कथित तौर पर 14 दिन तक लगातार <link type="page"><caption> सामूहिक बलात्कार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130911_delhi_rape_reax_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> होता रहा. इससे बच निकलने के बाद भी उसकी यातना ख़त्म नहीं हुई.
पुलिस उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जा रही है और सरकारी अस्पताल के डॉक्टर कभी अदालत की पेशी में व्यस्त होने का हवाला दे रहे हैं तो कभी ड्यूटी का समय पूरा होने का.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और लापरवाही करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.
दूसरी ओर चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल चेकअप में अगर देरी हुई, तो कथित दुष्कर्म के सबूत कमज़ोर पड़ जाएंगे.
अपहरण और दुष्कर्म
यह लड़की बिलासपुर के मरवाही इलाके की है. 16 साल की इस आदिवासी लड़की का अपहरण उसके पड़ोसी गांव के चार युवकों ने 15 नंवबर को किया था. चारों उसे दूसरे गांव ले गए और बंधक बनाकर रखा, जहां उसके साथ यह कथित वारदात हुई.
पीड़िता किसी तरह भाग निकली और उसने परिजनों के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई.
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में फरार होल्ला सोनी, देवेंद्र शर्मा, प्रमोद यादव और सलाम अंसारी के ख़िलाफ़ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कर लिया.
शुक्रवार को पुलिसकर्मियों ने पीड़िता का मेडिकल चेकअप कराने की कोशिश की. जब वे उसे लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें महिला चिकित्सक अनुपस्थित मिलीं.
"आज तो संडे है"
अगले दिन शनिवार सुबह दो महिला आरक्षकों के साथ पीड़िता को जांच के लिए गौरेला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.
वहां पता चला कि अस्पताल की एक महिला चिकित्सक प्रशिक्षण में गई हैं तो दूसरी पेशी में गई हैं.
मरवाही के थाना प्रभारी संतोष कुमार उपाध्याय के अनुसार “शाम तक इंतज़ार के बाद भी जब कोई डॉक्टर नहीं मिला, तो हमें मजबूरन वापस आना पड़ा.”
रविवार सुबह भी पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शाम तक मेडिकल जांच नहीं हुई.
मौक़े पर मौजूद गौरेला टीबी सेनेटोरियम की महिला चिकित्सक ने अपनी ड्यूटी पूरी होने का हवाला देकर चेकअप से मना कर दिया.
गौरेला के विकासखंड अधिकारी एआई मिंज ने पूरे मामले से अपनी अनभिज्ञता जताते हुए कहा-“आज तो संडे है, छुट्टी है. मैं तो अब सोमवार को ही इस बारे में पता करके कुछ बता पाऊंगा.”
जांच का इंतजार
डॉक्टरों को आशंका है कि कहीं तथाकथित दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच में देरी से कथित दुष्कर्म के सबूत नष्ट न हो जाएं.
बिलासपुर के वरिष्ठ चिकित्सक आरआर तिवारी कहते हैं, ''आमतौर पर 48 घंटे तक दुष्कर्म के मामले में चिकित्सकीय परीक्षण के बेहतर परिणाम आते हैं. अगर बाहरी चोट न हो, तो ऐसे सबूत समय गुज़रने के साथ साथ नष्ट होते चले जाते हैं. इस मामले में अब तक पीड़िता का परीक्षण नहीं हो सका है. यह चिंताजनक है.''
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि अगर मरवाही या गौरेला में महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी, तो पीड़िता की जांच पास के किसी इलाक़े में स्वास्थ्य केंद्र में करवाई जा सकती थी.
अमर अग्रवाल कहते हैं, ''इस तरह की लापरवाही भयावह है. इस मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी होगी.''
लेकिन पेंड्रा-मरवाही के स्थानीय पत्रकार अखिलेश नामदेव ऐसी किसी भी कार्रवाई को नाकाफ़ी मानते हैं. उनका कहना है कि शुक्रवार से पुलिस और स्वास्थ्य महकमा पीड़िता के मेडिकल जांच को लेकर जैसा व्यवहार कर रहा है, वह किसी प्रताड़ना से कम नहीं है.
इससे अनजान यह लड़की अब अगले दिन का इंतज़ार कर रही है. उसे उम्मीद है कि शायद अब उसका मेडिकल चेकअप हो जाएगा और इसके बाद पुलिस कथित आरोपियों को सज़ा भी दिलाएगी.
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