मध्य प्रदेश में 350 करोड़पति उम्मीदवार

- Author, ऋषि पांडे
- पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
मध्य प्रदेश विधान सभा चुनावों में किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों के शपथपत्र को देखकर लगता है कि इस बार भाजपा, कांग्रेस और बसपा के आधे से ज़्यादा उम्मीदवार करोड़पति हैं.
मध्य प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने उम्मीदवारों की ओर से नामांकन फॉर्म दाख़िल करते समय चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र के विश्लेषण के बाद यह जानकारी दी.
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एडीआर से जुड़े राज्य के पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू कहते हैं, "राज्य में ग़रीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों की संख्या 40 फ़ीसदी के आसपास है जबकि विधानसभा चुनावों में करोड़पति उम्मीदवारों की तादाद 51 फ़ीसदी है.''
एडीआर ने पूरे प्रदेश में विधानसभा का चुनाव लड़ रहे कुल 2,583 उम्मीदवारों में से तीन प्रमुख दल कांग्रेस, भाजपा और बसपा के 686 उम्मीदवारों में से 683 उम्मीदवारों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया. विश्लेषण के परिणाम बेहद रोचक और चौंकाने वाले निकले हैं.
एडीआर और इलेक्शन वॉच के मुताबिक़ फिर से चुनावी अखाड़े में उतरे मौजूदा आठ विधायकों की संपत्ति 1,000 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा बढ़ गई है जबकि 16 निवर्तमान विधायकों की हैसियत में 500 फीसदी या इससे अधिक का इज़ाफ़ा हुआ है और मौजूदा 113 प्रतिनिधियों की संपत्ति में 500 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है.
'पैन नंबर तक नहीं'

गुर्टू कहते हैं, ''पिछले पांच सालों में इन दलों की प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति भी बढी है. भाजपा के 229 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.04 करोड़ रुपए प्रति उम्मीदवार है जबकि कांग्रेस के 228 प्रत्याशियों में यह 5.33 करोड़ रुपए प्रति उम्मीदवार पर बनती है. बसपा के 226 उम्मदवारों की औसत संपत्ति 76.62 करोड़ रुपए है.''
फिर से चुनाव लड़ रहे 141 विधायकों की संपत्ति में इन पांच सालों में औसतन 242 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज हुई. पार्टियों के औसत के हिसाब से देखें तो एक ओर जहां भाजपा विधायकों की संपत्ति में 253 फीसदी वहीं कांग्रेस विधायकों की संपत्ति में 235 फीसदी और बसपा विधायकों की औसत संपत्ति में 270 फ़ीसदी तक का इज़ाफ़ा हुआ है.
सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन कहते हैं, ''यह कम आश्चर्यजनक नहीं है कि 143 उम्मीदवारों ने शपथ पत्र में अपने पैन नंबर तक का उल्लेख नहीं किया है और कई उम्मीदवारों ने आयकर के ब्यौरे नहीं दिए हैं.''
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सचिन सवालिया लहजे में कहते हैं, ''आखिर चुनाव आयोग शपथ पत्रों की जांच किस तरीक़े से कर रहा है.''
एडीआर और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनावों में तीन दलों के 683 उम्मीदवारों में से 350 यानी 51 फ़ीसदी करोड़पति हैं. इनमें भाजपा के 70 फ़ीसदी, कांग्रेस के 66 फ़ीसदी और बसपा के 18 फ़ीसदी हैं.
साल 2008 में भाजपा के 35 फ़ीसदी, कांग्रेस के 37 फ़ीसदी और बसपा के 13 फ़ीसदी उम्मीदवार करोड़़पति थे. यानी 2008 के मुक़ाबले करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में 22 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है.
देनदारियाँ

एडीआर और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक़ राज्य में सबसे अधिक संपत्ति वाले तीन प्रत्याशी हैं. विजयराघवगढ से लड़ रहे कांग्रेस के संजय पाठक, रतलाम शहर से भाजपा प्रत्याशी चेतन कश्यप और देपालपुरे क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल.
संजय पाठक की घोषित संपत्ति 121.32 करोड़ रुपए, चेतन कश्यप की घोषित संपत्ति 120.29 करोड़ रुपए और सत्यनारायण पटेल की घोषित संपत्ति 70.96 करोड़ रुपए की है.
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हालांकि ऐसा नहीं है कि चुनावी अखाड़े में सब करोड़पति उम्मीदवार ही हैं. 28 प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिनके पास 10 लाख रुपए से कम की संपत्ति है. बसपा के एक उम्मीदवार ने तो शून्य संपत्ति घोषित की है.
स्थानीय पत्रकार गिरीश उपाध्याय कहते हैं, ''उम्मीदवारों की देनदारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. संजय पाठक ने सर्वाधिक 48.70 करोड़ रुपए की देनदारियां घोषित की है जबकि भाजपा के सुरेन्द्र पटवा ने 34.49 करोड़ रुपए की देनदारी घोषित की है.''
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश दीवान कहते हैं, ''चुनाव आयोग को इन शपथ पत्रों की बारीकी से जांच करनी चाहिए. विश्लेषण के दौरान ऐसा अनुभव हुआ कि उम्मीदवारों की ओर से दाख़िल किए गए शपथ पत्र को भरने में गंभीरता नहीं दिखाई गई या गलत जानकारियाँ दी गई हैं.''
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