सौदे में कुछ ग़लत नहीं किया: अगस्ता वेस्टलैंड

भारत सरकार को 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति का सौदा करने वाली कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के अधिकारियों ने बुधवार को रक्षा मंत्रालय के अफ़सरों से मुलाक़ात की.
अगस्ता वेस्टलैंड ने कहा है कि उसने 3600 करोड़ रुपए के इस सौदे को पाने के लिए कोई ग़लत काम नहीं किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से बुधवार को मिलने के बाद कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने मंत्रालय के साथ इस मामले में मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्ण को नियुक्त किया है.
उधर, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अगस्ता वेस्टलैंड के अधिकारियों ने किसी भी तरह के ग़लत काम से इनकार किया है. बैठक में मंत्रालय का प्रतिनिधित्व संयुक्त सचिव और वायुसेना के लिए अधिग्रहण प्रबंधक उपमन्यु चटर्जी समेत कई और अधिकारियों ने किया.
इससे पहले भारत के 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों का सौदा रद्द करने की अफ़वाहों के बीच इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने इस बात से इनकार किया था कि भारत के रक्षा मंत्रालय ने उनसे इस बारे में बातचीत के लिए संपर्क किया है.
फिनमेकेनिका ने तब कहा था, "भारत को 12 वीवीआईपी, एडब्ल्यू 101 हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति का क़रार रद्द करने की संभावना से जुड़ी ख़बरें प्रेस में आ रही हैं. हम साफ़ करना चाहते हैं कि हमारी सब्सीडियरी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड को भारत के रक्षा मंत्रालय से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कंपनी ने अपने बयान में अनुबंध और उससे पहले हुए क़रार के उल्लंघन के सभी आरोप भी खारिज किए हैं.
रिश्वत के आरोप
पीटीआई के मुताबिक़ रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दावा किया था कि कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसके लिए भारत सरकार ने कंपनी के खिलाफ़ कार्रवाई की है. अगस्ता वेस्टलैंड की सफ़ाई रक्षा मंत्री के बयान के बाद आई है.
ऐसे आरोप हैं कि इस सौदे को पाने के लिए कंपनी ने 300 करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी.
इस ब्रितानी-इतालवी कंपनी को पहले ही सौदा रद्द करने के लिए अंतिम शो-कॉज़ नोटिस दे दिया गया है और कंपनी के पास जवाब देने के लिए 26 नवंबर तक का समय है.
भारत सरकार पहले ही सीबीआई जांच का आदेश दे चुकी है. इस साल फ़रवरी में रक्षा मंत्री ने कहा था कि अगर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हुए, तो सौदा रद्द भी किया जा सकता है.
इसके अलावा घोटाले की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति भी गठित की गई थी.
मामला
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने फिनमैकेनिका कंपनी से साल 2010 में करीब 3600 करोड़ रुपए में 12 अति सुरक्षित अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टरों की ख़रीददारी की थी.
इन में से तीन हेलिकॉप्टर भारत आ चुके हैं और बाक़ी के नौ हेलिकॉप्टरों के इस साल जून-जुलाई तक भारत आने की संभावना थी.

भारत ने इस मामले में ब्रिटेन से भी जानकारी मांगी, लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिली.
फ़िनमैकेनिका इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड की सहयोगी कंपनी है और इसमें 30 फ़ीसदी हिस्सेदारी इटली सरकार की है.
सौदे के एक साल बाद इटली के मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आईं कि यूरोप में दो बिचौलियों को गिरफ़्तार किया गया है, जिन्होंने सौदा कराने में अहम भूमिका निभाई.
छत्तीसगढ़ में भी आपत्ति
वैसे अगस्ता वेस्टलैंड का रक्षा मंत्रालय के साथ सौदा भले फ़िलहाल सुर्खियों में हो, पर यह बात कम ही लोग जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में भी सरकार ने अधिक कीमत देकर अगस्ता ए-109 पावर हेलिकॉप्टर ख़रीदे हैं.
छत्तीसगढ़ सरकार की इस ख़रीद पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने भी आपत्ति दर्ज की थी.
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि अगस्ता कंपनी का हेलिकॉप्टर ख़रीदने के लिए एक खास ब्रांड और विशिष्ट मॉडल का टेंडर बुलाकर अधिक क़ीमत में खरीद करना न तो किसी भी प्रकार से सहभागिता को बढ़ाता है और न न्यायोचित है. कैग ने हेलिकॉप्टर ख़रीद पर कई सवाल उठाए और सरकार से जवाब-तलब किया.
मगर छत्तीसगढ़ सरकार के जवाब भी कैग के सवालों के घेरे में रहे और अंततः कैग की फ़ाइल दूसरी ढेरों फाइलों के बीच दबकर रह गई.
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