छत्तीसगढ़: 'किसका बेटा रिकॉर्ड मतों से जीतेगा'

- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, छत्तीसगढ़ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
छत्तीसगढ़ में मंगलवार को विधानसभा की जिन 72 सीटों पर मतदान हुआ है, उनमें कई सीटों पर राज्य के दिग्गज नेताओं की इज़्ज़त दांव पर लगी है. चुनाव में कुल 842 प्रत्याशी मैदान में हैं.
राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों की नज़रें ख़ासतौर पर राजधानी रायपुर और राज्य के दूसरे बड़े शहर बिलासपुर पर टिकी हुई हैं.
राजधानी रायपुर में भाजपा के क़द्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ कांग्रेस ने महापौर किरणमयी नायक को उतारा हुआ है.
वहीं बिलासपुर में स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के खिलाफ कांग्रेस की महापौर वाणी राव मैदान में हैं.
लगातार तीन बार बिलासपुर के विधायक रहे अमर अग्रवाल कहते हैं, "कांग्रेस ने असल में ऐसे लोगों को मैदान में उतारा है, जो पहली बार सत्ता में आए हैं और उनका असली चेहरा उजागर हो चुका है. ऐसे में कांग्रेस का दांव फेल हो जाएगा.”
किसका बेटा

राजनीतिक गलियारों में इसकी भी चर्चा है कि सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड कौन बनाएगा? पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी या नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल.
अमित जोगी जीवन का पहला चुनाव अपने पिता की परंपरागत सीट मरवाही से लड़ रहे हैं, जहां उनका मुक़ाबला भाजपा की समीरा पैकरा से है.
अमित जोगी जिस मरवाही सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उसी से उनके पिता अजीत जोगी ने सर्वाधिक मतों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड बनाया था.
इसी तरह नंदकुमार पटेल की खरसिया सीट से उनके बेटे उमेश पटेल को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है. दोनों ही नेता पुत्र जी-जान लगा रहे हैं.
हार का रिकॉर्ड

बिल्हा में विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक एक बार फिर कांग्रेस के सियाराम कौशिक के सामने हैं और जोगी समर्थक सियाराम उन्हें हराने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.
कई बार हार का रिकॉर्ड बना चुके अरुण वोरा दुर्ग से चुनाव लड़ रहे हैं. वे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के बेटे हैं.
अंबिकापुर के कांग्रेस विधायक और महाराजा टी एस सिंहदेव का मुकाबला एक बार फिर भाजपा के युवा प्रत्याशी अनुराग सिंह देव से है.
पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर मात्र आधा प्रतिशत का था. हालांकि कहा जा रहा है कि इस बीच टीएस सिंह देव ने अपनी स्थिति ठीक की है, लेकिन असलियत तो आठ दिसंबर को चुनाव परिणावों के बाद सामने आएगी.
सरगुजा संभाग के ही रामानुजगंज से आदिवासी मंत्री रामविचार नेताम मैदान में हैं.
उनके खिलाफ कांग्रेस ने बृहस्पति सिंह को मैदान में उतारा है. पिछला चुनाव नेताम महज चार फ़ीसदी मतों के अंतर से जीते थे. इसलिए इस सीट पर भी इस बार कांटे की लड़ाई है.
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