किसानों पर करोड़ों का बिजली बिल बक़ाया

- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
महाराष्ट्र के किसानों से बक़ाया बिजली के बिलों की वसूली के लिए पहली बार राज्य सरकार ने कड़े क़दम उठाए हैं. हज़ारों किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने 40 साल से बिजली के बिल नहीं चुकाए हैं.
महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल ने एक अहम निर्णय लेते हुए किसानों को अप्रैल 2012 तक के बक़ाया बिजली के बिलों का भुगतान अधिकतम तीन किस्तों में करने का आदेश दिया है.
सरकार का कहना है कि जिन किसानों की बिजली काटी गई है, उनकी बिजली आपूर्ति पहली किस्त भरने के बाद शुरू कर दी जाएगी.
किसानों पर 8508 करोड़ बकाया
महाराष्ट्र बिजली बोर्ड की इकाई महावितरण के आंकड़ों के अनुसार राज्य के <link type="page"><caption> किसानों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/01/120126_farmers_bardhman_ss.shtml" platform="highweb"/></link> पर कुल 8508 करोड़ रुपए बक़ाया हैं.
क़रीब तीन लाख उपभोक्ताओं ने पिछले 10 से 40 सालों में बिजली के बिल नहीं दिए हैं. 12 हज़ार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले 40 सालों से क़रीब 111 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है.
32 हज़ार उपभोक्ताओं ने 30 सालों में 314 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया. जबकि 74 हज़ार ऐसे किसान हैं, जिन पर 20 सालों में 757 करोड़ रुपए के बिल बक़ाया हैं. वहीं ढाई लाख उपभोक्ताओं ने दस सालों में 2356 करोड़ का भुगतान नहीं किया.

हैरानी की बात ये भी है कि राज्य के क़रीब साढ़े छह लाख उपभोक्ताओं ने आज तक कभी बिल नहीं भरा. उन पर 2077 करोड़ रुपए की देनदारी है.
सन 2005 में महाराष्ट्र बिजली बोर्ड के विभाजन के बाद महावितरण की स्थापना हुई. बक़ाया बिलों की वसूली के प्रयास शुरू किए गए.
पहली बार सरकार की सख़्ती
अब तक सभी राज्य सरकारें <link type="page"><caption> किसानों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/11/111110_bundel4_embargo_rj.shtml" platform="highweb"/></link> पर सख़्त करवाई से कतराती रहीं. मगर अब सरकार ने बिजली बिलों की वसूली के लिए कड़े क़दम उठाने का मन बना लिया.
भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की बिजली अब बिना किसी रियायत के काट दी जाएगी.
राज्यमें महावितरण के पांच उपविभाग ऐसे है जहां बिजली के बिलों की होने वाली वसूली वहां मौजूद कर्मचारीयों वेतन से भी कम है. महवितरण के सूत्रों के मुताबिक़ ऐसे विभागों में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं की जा सकती जहां इतना घाटा कई वर्षों से चला आ रहा है.
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