रेपो रेट में बढ़ोत्तरी, आप पर क्या होगा असर?

- Author, अनुराग गर्ग
- पदनाम, प्रेसिडेंट, रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज़, डियॉन
रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों की समीक्षा करते हुए रेपो रेट में चौथाई फ़ीसदी की बढ़ोतरी कर दी है. रेपो रेट वो ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक रिज़र्व बैंक से कर्ज़ लेते हैं.
डियॉन की रिसर्च एंड इंफ़ॉर्मेशन सर्विसेज़ के प्रेसिडेंट अनुराग गर्ग ने बीबीसी को बताया कि रेपो रेट में इस बदलाव का आम आदमी पर क्या असर होगा और क्यों महंगाई काबू में नहीं आ रही.
ग़रीबों को राहत
रेपो रेट एक नीतिगत दर है, जिससे इस तरह का संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें कैसी रहेंगी.
अगर रेपो रेट में ताज़ा बढ़ोत्तरी को संकेत मानते हुए बाकी बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो मध्यम वर्ग के लोगों के लिए हुए होम लोन या ऑटो लोन की किस्तों यानी ईएमआई से थोड़ा फ़र्क पड़ सकता है.
मैं समझता हूं कि रघुराम राजन का ये क़दम उन लोगों के लिए ज़्यादा अच्छा है, जो ग़रीब तबके के हैं, क्योंकि इस तबके पर ईएमआई का असर नहीं पड़ता.
इस वर्ग पर महंगाई का असर पड़ता है. ख़ासतौर पर सितंबर में खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर 18.4 फ़ीसदी रही है. इसलिए रघुराम राजन महंगाई कम करना चाहते हैं.
महंगाई पर ध्यान

यह बात सही है कि महंगाई काबू में नहीं आ रही है, लेकिन रघुराम राजन को कोशिशें तो करनी ही पड़ेंगी.
उन्हें यह भी उम्मीद होगी कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में ईंधन की कीमतें कम हो जाएं. ऐसा हुआ तो महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी.
मुझे लगता नहीं कि इस आर्थिक साल के अगले पांच महीनों में कुछ बहुत ज़्यादा असर पड़ेगा. मांग तो कम हो रही है, लेकिन महंगाई कम नहीं हो रही.
आर्थिक विकास तो कम है ही. राजन ने यह सोचा है कि महंगाई पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए.

अगर वह रेपो रेट कम भी करते, तो उसका आर्थिक विकास पर बहुत ज़्यादा असर नहीं होता. आर्थिक विकास बढ़ता, तो उसका महंगाई पर असर होता.
मुझे नहीं लगता कि अर्थव्यवस्था उबर रही है. अभी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. हर तरफ़ मांग कम है. कम अवधि में मुझे अर्थव्यवस्था के उबरने की उम्मीद नहीं दिखती.
उद्योगों पर होगा असर?
उद्योग चाहते हैं कि ब्याज दरें कम रहें ताकि उन्हें कम दरों पर कर्ज़ मिल सके. यह तभी होता है जब अर्थव्यवस्था में पैसा अच्छा हो. मुझे लगता है कि राजन का ध्यान इस पर भी है कि जब चुनाव आते हैं, तो पैसा अपने आप बढ़ता है.
राजन के दिमाग़ में ये बात है कि पैसा बढ़ना ही है. ऐसे में अगर ब्याज दरें और कम करते हैं, तो पैसा बढ़ेगा और महंगाई बढ़ेगी.
उद्योग जगत के लिए उन्होंने यह भी कहा है कि नीतिगत फ़ैसलों की वजह से जो प्रोजेक्ट अटके हुए हैं, उनको बढ़ावा दिया जाए. इससे उद्योग जगत को फ़ायदा होगा.
मॉनीटरी पॉलिसी
रिज़र्व बैंक समय-समय पर महंगाई और विकास की वजह से अर्थव्यवस्था में समय-समय पर पैसा कितना होना चाहिए उसका संतुलन बनाने के लिए कुछ कदम उठाता है जिसे हम मॉनिटरी पॉलिसी कहते हैं.
(बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा से बातचीत पर आधारित)
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