'सकारात्मक है रिज़र्व बैंक की नई नीति'

- Author, आलोक पुराणिक
- पदनाम, आर्थिक मामलों के जानकार
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की नई नीति मिलीजुली और सकारात्मक है.
पिछले तीन-चार सालों से आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा के बाद ब्याज दरें बढ़ जाती थीं.
लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. इस बार ईएमआई न घटेगी, न बढ़ेगी.
कई बैंकों ने बयान दिया है कि <link type="page"><caption> रिज़र्व बैंक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130920_monetry_policy_sks.shtml" platform="highweb"/></link> से बढ़ी दर पर पैसा मिलने के बावजूद वो ग्राहकों से ज़्यादा ब्याज दर नहीं लेंगे.
जो लोग मकान वगैरह लेने जा रहे थे उन्हें बढ़ी हुई ब्याज दर नहीं देनी होगी. लेकिन कार, बाईक, घरों की ईएमआई कम भी नहीं होने जा रही हैं.
महँगाई कम करने की कोशिश
आरबीआई के गवर्नर <link type="page"><caption> रघुराम राजन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130809_raghuram_rajan_rbi_ap.shtml" platform="highweb"/></link> के बयान से यह संकेत मिलता है कि महँगाई को लेकर रिज़र्व बैंक बहुत चिंतित है और आने वाले समय में ब्याज दरों के कम होने की कोई उम्मीद नहीं है.
रिज़र्व बैंक ने रेपो दर में .25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 7.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.50 प्रतिशत कर दिया है.
नई <link type="page"><caption> मौद्रिक नीति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130920_rbi_rohit_bansal_ap.shtml" platform="highweb"/></link> के तहत बैंको को रिज़र्व बैंक से पैसा लेना थोड़ा महँगा पड़ेगा. अगर बैंकों को ब्याज ज़्यादा देना पड़ेगा तो इसका मतलब है कि बैंक अपनी ब्याज़ दरों को कम नहीं करेंगे.
रिज़र्व बैंक ने दो छोटे छोटे ऐसे कदम भी उठाए गए हैं जिनसे लगता है कि रिज़र्व बैंक चाहता है कि ब्याज दरें कम हों.

रिज़र्व बैंक ने मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) को 10.25 प्रतिशत से घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया गया है.
इसके तहत अब बैंकों को रिज़र्व बैंक से थोड़ा सस्ता लोन मिल सकेगा. बैंकों को अपने कैश का एक हिस्सा रिज़र्व बैंक में रखना पड़ता है. इस सीमा में भी मामूली कमी की गई है.
पहले बैंक को दिन प्रतिदिन के आधार पर पहले 100 में से 99 पैसे रखने पड़ते थे अब उन्हें 95 पैसे रखने होंगे.
इससे बैंकों के पास लोगों को कर्ज देने के लिए ज़्यादा पैसा उपलब्ध होगा.
इससे स्पष्ट है कि रिज़र्व बैंक यह संदेश देना चाहता है कि हम पूरी कोशिश कर हैं कि ब्याज दर कम हो जाएं लेकिन महँगाई हमें इसकी इजाज़त नहीं दे रही है.
रिज़र्व बैंक की चिंता है कि अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बहुत कम हो जाएँगी तो चीजों की खपत बहुत बढ़ जाएगी और इसके परिणामस्वरूप महँगाई भी बढ़ जाएगी.
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