तेलंगाना पर जगन के आरोपों में कितना है दम?

तेलंगाना पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद आंध्र प्रदेश में विरोध तेज़ होता जा रहा है.
आंध्र के कई शहरों में प्<link type="page"><caption> रदर्शन और हिंसा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131006_telangana_vijaynagar_protest_nn.shtml" platform="highweb"/></link> की ख़बरें हैं. कुछ ट्रेनें रद्द कर दी गईं और कई देरी से चल रही हैं.
आंध्र के कई ज़िलों में हिंसा, आगज़नी और प्रदर्शन की ख़बरें हैं. विजयवाड़ा में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई. विजयनगर में शनिवार से कर्फ़्यू लगा है.
कांग्रेस पर आरोप
वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हैदराबाद में शनिवार से आमरण अनशन कर रहे हैं.
उन्होंने कांग्रेस पर किसी संवैधानिक प्रक्रिया के पालन के बिना अलग <link type="page"><caption> तेलंगाना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131006_telangana_seemandhra_protest_sp.shtml" platform="highweb"/></link> राज्य बनाने का फ़ैसला करने का आरोप लगाया है.
टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार से दिल्ली में अनशन पर बैठने की घोषणा की है.
नायडू ने राज्य के बंटवारे को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे 'राजनीतिक मैच फ़िक्सिंग' करार दिया.

उनका आरोप है कि राज्य का विभाजन करके कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है.
'आरोप संवैधानिक नहीं'
जगनमेहन रेड्डी का कहना है कि तेलंगाना का फ़ैसला अकेले कैबिनेट नहीं ले सकता.
बीबीसी के साथ बातचीत में संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा, ''संविधान के मुताबिक़ किसी राज्य के विभाजन के लिए संसद द्वारा क़ानून बनाया जाना चाहिए. संसद में बिल पेश होने से पहले राष्ट्रपति इसकी सिफ़ारिश करते हैं, लेकिन राष्ट्रपति को अपनी सिफ़ारिश देने से पहले राज्य विधानसभा से परामर्श करना ज़रूरी है, पर राष्ट्रपति के लिए उनकी राय मानना बाध्यकारी नहीं है.''

सुभाष कश्यप के मुताबिक़, पहले नए राज्यों के गठन या किसी भी राज्य के विभाजन से पहले, उसके विधानमंडल से प्रस्ताव पास होकर संसद में आता रहा है.
उनका कहना है, ''जगन का यह आरोप पहले किए गए फ़ैसलों पर आधारित है. इसलिए जगन का यह आरोप संवैधानिक नहीं है. जगन का केंद्र सरकार के फ़ैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देना भी संवैधानिक रूप से ठीक नहीं होगा.''
<link type="page"><caption> तेलंगाना पर पुलिस औऱ प्रदर्शनकारियों में फिर मुठभेड़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131006_telangana_vijaynagar_protest_nn.shtml" platform="highweb"/></link>
तेलंगाना को राज्य बनाने के फ़ैसले से असल राज्य बनाने तक क्या संवैधानिक प्रक्रिया रहेगी?
इस सवाल के जवाब में सुभाष कश्यप का कहना है, ''पहले एक जीओएम (मंत्री समूह) बनता है. सरकार ने भी एक जीओएम को मंज़ूरी दी है, जिसमें प्रशासन और अधिकारी शामिल होते हैं. वे सलाह-मशविरा कर राज्य की संपत्ति, क्षेत्र, अधिकारियों का बँटवारा करते हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय, क़ानून मंत्रालय से परामर्श लेकर बिल ड्राफ़्ट करता है. फिर कैबिनेट द्वारा इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाता है और राष्ट्रपति को राज्य के विधानमंडल की राय लेनी होती है.''
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि इसके बाद एक बिल को पास कराने की जो प्रक्रिया होती है, वही इस बिल की भी रहेगी.
यह पूछने पर कि इस पूरी प्रक्रिया में कितना वक़्त लगेगा?
सुभाष कहते हैं कि यह राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय होगा और सरकार पर निर्भर करता है कि वह इसे एक-दो महीने में पूरा करे या एक साल में.
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