भारतीय अफ़सरशाही की असली तस्वीर

- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के नोएडा की युवा आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबनराष्ट्रीय स्तर पर बहस का मुद्दा बना.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने न केवल दुर्गाशक्ति को निलंबित किया बल्कि उनका समर्थन करने वाले डीएम का भी तबादला कर दिया.
आज आईएएस के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप इतना बढ़ गया है कि जिन आईएएस अधिकारियों के तबादले तीन साल में हुआ करते थे, उनके तबादले हर छह महीने या कभी-कभी हर तीसरे महीने होने लगे हैं.
तो अफ़सरशाही को निभाना इतना आसान भी नहीं रह गया है.
बेहतरीन टैलेंट का दावा
आम तौर पर कहा जाता है कि सबसे बेहतरीन टैलेंट इस नौकरी के लिए चुने जाते हैं. इसके चार्म पर कारपोरेट जगत की भारी भरकम तनख़्वाह की नौकरी भी कोई असर नहीं डाल पाई.
ऐसा हो भी क्यों न. आख़िरकार देश को चलाने का काम आईएएस के कंधों पर ही जो है.

ऐसे में हमने सोचा क्यों न आपको भारतीय प्रशासनिक सेवा की बारीकियों के बारे में बताएं, उनकी मुश्किलों के बारे में बात करें.
इस सिलसिले में हम इन अधिकारियों के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं पर भी नज़र डालेंगे जिन्होंने अपनी क़ाबिलियत का लोहा देश ही नहीं विदेशों में भी मनवाया.
मसलन एक ऐसे आईएएस अधिकारी हुए हैं जिन्हें चार-चार प्रधानमंत्रियों का पूरा विश्वास हासिल हुआ.
हमारी सिरीज़ में एक कहानी उस अफ़सरशाह पर भी होगी जो जब तक इंदिरा गाँधी के साथ रहे तब तक इंदिरा दुर्गा बनीं रहीं और जैसे ही उन्होंने इंदिरा का साथ छोड़ा, इंदिरा के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो गया.
इस सिरीज़ में आपकी मुलाकात एक ऐसे आईएएस अधिकारी से भी कराएंगे जो तीन धुर विरोधी मुख्यमंत्रियों के प्रधान सचिव रहे और हर मुख्यमंत्री अपनी फ़ाइल पर उनके हस्ताक्षर को ही आदेश मानते रहे.
लेकिन सारे अधिकारी ऐसे नहीं.
बदलता चेहरा
कई अधिकारी ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने रिश्वत और लूट खसोट का रिकॉर्ड बना दिया. इनकी भी चर्चा इस सिरीज़ में होगी.
लेकिन इन सबके बीच बात उन आईएएस अधिकारियों की भी होगी जिन्होंनेमंत्रियों को नो मिनिस्टर कहने का साहस दिखाया और अपनी अंतरात्मा पर काम करते रहे चाहे बाद में इसका ख़ामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ा.
इस ख़ास सिरीज़ में बात उन युवाओं की भी होगी, जो आईएएस के तमाम विवादों के बावजूद आज भी सोते-जागते आईएएस बनने का ख़्वाब देखते हैं.
तो इंतज़ार कीजिए 16 सितंबर से शुरू होने वाले बीबीसी हिंदी की ख़ास सिरीज़ 'भारतीय अफ़सरशाही की असली तस्वीर' की.
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