'बच्चों को दंगे के बारे में क्या बताएं?'

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में दो अलग-अलग समुदायों के बीच भड़का दंगा शांत होने का नाम नहीं ले रहा.
कर्फ़्यू से इलाक़े के लोगों की आवाजाही और रोज़मर्रा की जरूरतों की आपूर्ति पर संकट पैदा हो गया है.
जानिए <link type="page"><caption> दंगों से प्रभावित</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130906_muzaffarnagar_violence_tensions_dil.shtml" platform="highweb"/></link> लोगों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी.
अनूप सिंह
पहले भी <link type="page"><caption> दोनों समुदायों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130909_harmony_in_muzaffarnagar_village_dil.shtml" platform="highweb"/></link> के बीच तनाव के कारण कई बार कर्फ़्यू लगा है लेकिन पहले दंगे शहर तक ही सीमित रहते थे.
जिन इलाक़ों में मुस्लिम आबादी होती थी, वहां और उसके आसपास ही परेशानी रहती थी. दंगे का असर दो से तीन दिन रहता था. फिर सभी अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में लग जाते थे. सब कुछ भूल जाते थे.
अब दंगों का रुख देहात की ओर हो रहा है. यह चिंता की बात है क्योंकि देहात में रंजिशें लंबे समय तक चलती हैं.
मुझे इस बात की आशंका होती है कि यह दंगा कहीं और गंभीर रूप न ले ले.
हमारा समाज कृषिप्रधान है. शहर के आसपास के इलाकों में ज़्यादातर किसान और खेतिहर मजदूर बसते हैं. ऐसे में दोनों वर्गों की आपसी रंजिश, अविश्वास चिंता का विषय है.
इससे बहुत नुकसान होगा. इसकी भरपाई कब तक हो पाएगी, पता नहीं.

मैं मुज़फ़्फ़रनगर इलाक़े में तीन साल से रह रहा हूं. किसान परिवार से हूं. फिलहाल वकील हूं.
इस बार जो सांप्रदायिक दंगे हुए, ऐसा पहले कभी नहीं देखा. पहले शहर में सांप्रदायिक दंगे होते थे पर गांव में भाईचारा ज्यों का त्यों बना रहता था. अभी यह गांव में फैल गया है.
शहर के बाहरी इलाक़ों में बसे लोगों को इधर-उधर से राशन की आपूर्ति होती रहती है. इसलिए कर्फ्यू से उन्हें अभी कोई दिक्कत नहीं है.
हां, शहर के मुख्य केंद्रों के आसपास जो बसे हैं, उन्हें राशन-पानी की समस्या ज़्यादा आ रही है.
वर्तमान <link type="page"><caption> विवाद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130826_vhp_and_bjp_rd.shtml" platform="highweb"/></link> की तह में अगर जाएं तो पाएंगे कि शासन के स्तर पर लोगों में अविश्वास पैदा हुआ है और इसे शासन स्तर पर ही दूर किया जा सकता है.
शासन की नीति एक वर्ग को बढ़ावा देने की रही, उसने दूसरे की सुनी ही नहीं. यह संदेश लोगों तक पहुंचा और उसका नतीजा ये हुआ कि दंगे भड़क उठे.
इसलिए जब तक शासन निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा, सबको न्याय का भरोसा नहीं दिलाएगा, तब तक स्थिति में सुधार होने की गुंजाइश नहीं है.
तनवीर आलम
जहां यह बलवा शुरू हुआ, मैं उसी के 100 मीटर के दायरे में रहता हूं. प्रशासन को कर्फ़्यू में ढील नहीं देनी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि बलवाइयों के हौसले पस्त न हुए हों.
ऐसे में वे अगर नया शिगूफा छोड़ दें तो नया कोई तनाव पैदा हो सकता है. हो सकता है कर्फ़्यू और 10 दिन के लिए बढ़ा दिया जाए.
कर्फ़्यू तो बहुत बुरी चीज़ है. ग़रीब और मजदूर, चाहे वो किसी भी समुदाय का, संप्रदाय का हो, वही इसका शिकार होता है.
इलाक़े में दोनों ही तरफ के समुदाय दहशत में हैं.
कुछ शरारती तत्व अफ़वाहें फैलाकर भावनाएं भड़काते हैं. मेरी समझ से उनका मक़सद ही दंगा भड़काना और रातों को फ़ायरिंग करना है.
अनु गुप्ता

तनाव तो काफ़ी है. काम के लिए मैं भी बाहर जाती हूं, पति भी जाते हैं. बच्चे पढ़ने जाते हैं. ऐसे में तनाव तो होगा ही.
इस इलाक़े में हम 12 साल से रह रहे हैं. मेरी शादी को 20 साल हो गए हैं. यह पहला मौक़ा है कि दंगे भड़के हैं. मेरी तो बेटी बड़ी है, समझती है सब. मगर आसपास सारे बच्चे छोटे हैं. उन्हें इन दंगों के बारे में हम क्या बताएं?
हमारी कॉलोनी में मुस्लिमों की अच्छी-खासी संख्या है. उन सबसे अच्छे संबंध हैं.
रोज़ाना की ब्रेड और दूध की दिक्कत है. बाकी तो ये आइडिया लग ही गया था कि कर्फ़्यू लग सकता है.
इन हालात में लगता है कि जिनसे संबंध थे, उनसे वाकई आगे संबंध रखने हैं या नहीं ये सोचना पड़ेगा. मुमकिन है कि रिश्तों में खटास आ जाए.
क़ौसर ज़ैदी
आसपास का माहौल खराब है. वैसे कल से शहर में हालात सामान्य हैं.
बहरहाल, ये सब तो बर्दाश्त करना ही पड़ेगा. जो लोग उपद्रवी होते हैं उन्हें सज़ा मिलनी ही चाहिए. रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए अब परेशानी उठानी पड़ रही है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












