किश्तवाड़ हिंसा: पुलिस और प्रशासन पर जेटली के आरोप

किश्तवाड़ में हुई हिंसा के मसले पर राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि हिंसा के दौरान पुलिस मूक दर्शक बनी रही और सेना को समय पर तैनात नहीं किया गया.
दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कहा है कि इस मामले में केंद्र सरकार को दखल देना चाहिए और उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की.
इससे पहले राज्य सभा की कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार किश्तवाड़ में हुई हिंसा पर बयान देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की मांग थी कि पहले उसे बोलने का मौक़ा दिया जाए, फिर सरकार अपना बयान दे.
सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग को स्वीकार कर लिया.
मांग
बहस की शुरुआत करते हुए भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा, "किश्तवाड़ में हुई घटना दो समुदायों से संबंधी घटना नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता से जुड़ा हुआ मसला है."
उन्होंने कहा, "अगर किश्तवाड़ में हुई हिंसा को दोषियों को सजा नहीं मिलती है और सरकार इस मामले को हल्के में लेती है तो इसकी वही कीमत चुकानी पड़ेगी जो 1990 में घाटी में चुकानी पड़ी थी. इस साल घाटी से बड़ी संख्या में हिंदू पलायन कर गए थे."
अरुण जेटली ने निष्क्रियता के आधार पर किश्तवाड़ के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल हटाने की मांग की.
उन्होंने कहा, "धारा 144 के आधार पर कैसे राज्य में दो लोगों के प्रवेश को रोका जा सकता है?"
बर्खास्त हो सरकार

वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, "घटना के समय राज्य सरकार के गृह राज्य मंत्री किश्तवाड़ में ही मौजूद थे. वह चाहते तो कानून-व्यवस्था की स्थिति पर काबू पाया जा सकता था."
उन्होंने कहा, "मैं इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के पक्ष में हूँ. इस मामले में केंद्र सरकार को दखल देना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए."
मायावती ने कहा कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिलती है तो जम्मू कश्मीर सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए.
दूसरी ओर अरुण जेटली को टोकते हुए नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्लाह ने कहा कि गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान किसी को गुजरात नहीं आने दिया गया था और सेना की तैनाती में भी देरी की गई.
इस बीच जम्मू-कश्मीर के गृह राज्य मंत्री सज्जाद किचलू ने इस्तीफ़ा दे दिया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने उनका इस्तीफ़ा मंज़ूरी के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया है.
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