ताज कॉरिडोर मामले में मायावती को राहत

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की फिर से सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा है कि फ़ैसले पर विचार करने का कोई आधार नहीं है.
इस मामले में पिछली साल जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर एफ़आईआर को सर्वोच्च न्यायलय ने रद्द कर दिया था.
पिछले साल के फ़ैसले को रखा बरकरार
अदालत के फ़ैसले की जानकारी देते हुए मायावती के वकील सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, ‘जुलाई 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दर्ज एफ़आईआर को खारिज कर दिया था.
अदालत ने कहा था कि इस मामले में सीबीआई अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल गई थी. उसके पास इस मामले में ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था.’
उत्तर प्रदेश के एक नागरिक कमलेश वर्मा ने इस फैसले के खिलाफ़ समीक्षा याचिका दाखिल की थी. याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि इसे स्वीकार करने का कोई आधार नहीं दिखता.
समीक्षा याचिका में कुछ भी नया नहीं
मिश्रा ने कहा कि अदालत ने एक विस्तृत फैसले में पिछले साल के फ़ैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि इस समीक्षा याचिका में एक भी ऐसा आधार नहीं है, जिससे कि याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाय.
आगरा में ताजमहल के आस-पास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मयावती ने ताज कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी थी. इस परियोजना में घोटाले की शिकायत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा था.
पिछले साल के फ़ैसले में अदालत ने कहा था कि मायावती के खिलाफ आय से अधिक का मामला बेबुनियाद था. सीबीआई ताज कॉरिडोर मामले में कोषागार से 17 करोड़ रुपये जारी करने से संबंधित उसके फैसले को ठीक तरीके से समझे बिना मायावती के खिलाफ आगे बढ़ गई.












