महज़ रायशुमारी के लिए बसाया गया गाँव?

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, कालाहांडी के इजुरुपा गांव से
नियमगिरि में वेदांत के खनन प्रस्ताव पर रायशुमारी के लिए 112 आदिवासी गाँव ों में से महज़ 12 गाँव चुने जाने पर तो विवाद है ही लेकिन इनमें से कुछ ख़ास को क्यों चुना गया उसकी अपनी कहानियां हैं.
अब इजुरूपा की ही बात ले लें, ये वही गाँव है जहां कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दौरा किया था और उन्होंने न सिर्फ़ खनन के प्रस्ताव को नुक़सानदेह बताया था बल्कि <link type="page"><caption> आदिवासियों को भरोसा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130706_odisha_niyamgiri_ml.shtml" platform="highweb"/></link> दिलाया कि था वो दिल्ली में उनके सिपाही हैं.
गाँव में उस ग्राम सभा के दिन कुछ लोग कह रहे थे, "राहुल गांधी, वोटर लिस्ट बनाने वाले साहब और अब जज साहब, इतने ही साहब लोग आए हैं इस गाँव में."
बात इस पर भी हो रही थी कि हाल ही तक जिस गाँव की वोटर लिस्ट नहीं बनी थी, उसे ग्राम सभा के तौर पर क्यों चुना गया?
फ़िलहाल गाँव में चार वोटर हैं और वो आदिवासी नहीं हैं. आदिवासी किसी कारण से सालों पहले यहां से दूसरी जगह चले गए थे.
‘मैनेज’

<link type="page"><caption> नियमगिरि के इलाक़े में</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130722_battle_for_niyamgiri_aa.shtml" platform="highweb"/></link> आने वाले 112 गाँवों में से महज़ 12 को खनन प्रस्ताव पर राय देने के लिए बुलाए जाने को लेकर विवाद रहा है.
आरोप है कि राज्य सरकार ने जान-बूझकर कम गाँव चुने ताकि उन्हें ‘मैनेज’ करने में आसानी हो.
पर ओडिशा सरकार ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.
आरोप लग रहे हैं कि इजुरूपा में केवल एक परिवार रहता था. अब अन्य लोगों को यहां लाकर बसाया गया है.
यही पूछने पर कि क्या महज़ रायशुमारी के लिए गाँव तैयार किया गया?
लांजीगढ़ के ब्लॉक अधिकारी प्रवीर कुमार नायक ने कोई साफ़ जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा, “ताज़ा वोटर लिस्ट रिविज़न अभी ख़त्म हुआ है. वो तो हमेशा जारी रहता है.”
वो कहते हैं, “अगर हम ये देखेंगे कि कोई कहीं रह रहा है और वो वोटर लिस्ट में शामिल होने के सारी शर्तें पूरी कर रहा है तो उसे सूची में शामिल किया जाएगा उसमें कोई दिक्क़त नहीं है.”
"प्रतीक की ज़रूरत"

राय राहुल गांधी के दौरे को लेकर भी है.
वो यहां क्यों आए ये तो इसका अदाज़ा तो लोगों को नहीं है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता सरोज कहते हैं कि कांग्रेस और राहुल गांधी को जिस सिंबल या प्रतीक की ज़रूरत थी वो नियमगिरी में मौजूद थी.
उनका कहना है कि दक्षिण ओडिशा मे माओवाद ज़ोर पकड़ रहा था और अर्थनीति की वजह से एक धारणा ये भी बन रही थी कि कांग्रेस आदिवासी विरोधी है.
सरोज कहते हैं, “कांग्रेस इसका खंडन करने की कोशिश कर रही थी, संदेश ये भी देना था कि आदिवासियों को संविधान के भीतर भी न्याय मिल सकता है, साथ ही ये भी कि <link type="page"><caption> माओवाद ही एक रास्ता नहीं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130621_maoist_check_post_chhattisgarh_vr.shtml" platform="highweb"/></link>.”
साल 2009 में हुए आम चुनाव में पिछले कई बार से धराशायी हो रहे कांग्रेस के भक्त चरण दास को सांसद की सीट मिली.
कलाहांडी और रायगढ़ा में विपक्ष के पास पहले से मौजूद दो विधानसभा सीटें अब कांग्रेस के पास हैं.
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