'ग़रीब लोगों ने सबसे अमीर को रोका'

बुकर पुरस्कार जीतने वाली लेखिका अरुणधति रॉय ने ओडिशा के नियामगिरि पर्वतीय इलाके के डोंगरिया कोंध आदिवासियों के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में उनकी सराहना की है. यहां ब्रितानी वेदांता कंपनी एल्यूमिनियम <link type="page"><caption> प्लांट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130727_odisha_mining_village_panchayat_dil.shtml" platform="highweb"/></link> लगाना चाहती है.
उन्होंने कहा, "नियामगिरि इलाके के आदिवासियों ने बहुत मुश्किल समय देखा है और इसीलिए वे किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी के द्वारा और सताए जाने को तैयार नहीं हैं. ये लोग जानते हैं कि सरकारें उनके खिलाफ़ रहीं हैं”.
ये पूछे जाने पर कि तमाम विश्लेषकों का मत ये भी है कि अगर बड़ी कंपनियां इलाके में काम करेंगी तो पिछड़े कहे जाने वाले इस इलाके में तरक्की नहीं होगी, अरुणधति ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा, "वर्षों से सरकारें यही तर्क देकर <link type="page"><caption> डोंगरिया </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/07/130730_dongaria_kondh_tribe_gallery_ra.shtml" platform="highweb"/></link>कोंध जैसे दूसरे तमाम आदिवासियों का भी शोषण करतीं रही हैं, अब और नहीं. इस मुहिम में सबसे ग़रीब लोगों ने सबसे अमीर कंपनी को रोक दिया है”.
खारिज
इससे पहले ओडिशा में रायगडा ज़िले के बातूड़ी गाँव में हुई ग्राम सभा की बैठक ने नियामगिरि पर्वत में बॉक्साइट खनन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया था.
यहां ब्रितानी वेदांता कंपनी एल्यूमिनियम प्लांट लगाना चाहती है.
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल के अपने एक फ़ैसले में <link type="page"><caption> आदिवासियों </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130730_niyamgiri_diray_rd.shtml" platform="highweb"/></link>के 'पवित्र पर्वत' पर खुदाई की इजाज़त देने या नकारने का फ़ैसला ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने नियामगिरि के इर्द-गिर्द बसे रायगडा और कालाहांडी ज़िलों के 12 गावों में ग्राम सभा के गठन की घोषणा की.
इस क्रम में पहली ग्रामसभा रायगडा ज़िले के सेरकापाड़ी गाँव में 18 जुलाई को हुई. इसमें प्रस्ताव को सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया गया. शनिवार को इस कड़ी में छठी ग्रामसभा बातूड़ी गाँव में हुई. अब तक हुई तमाम ग्रामसभाओं में ग्रामीणों ने यह प्रस्ताव ख़ारिज ही किया है.
मामला

अगर वेदांता को <link type="page"><caption> नियामगिरि</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130719_vedanta_scrapped_order_fma.shtml" platform="highweb"/></link> में खुदाई की अनुमति नहीं मिलती तो न केवल यह रिफ़ाइनरी बल्कि झारसुगुड़ा में कंपनी के स्मेल्टर प्लांट के भी बंद होने की नौबत आ जाएगी और कंपनी द्वारा चालीस हज़ार करोड़ की लागत पर बनी यह पूरी परियोजना ख़तरे में पड़ जाएगी.
2003 में वेदांता और राज्य सरकार के उपक्रम ओडिशा माइनिंग कंपनी या ओएमसी के बीच समझौते के अनुसार वेदांता अगले 30 साल में क़रीब 150 मिलियन टन बॉक्साइट का खनन करने वाली थी.
स्थानीय डोंगरिया कोंध आदिवासियों के विरोध और अदालत में चल रहे मामलों के कारण कंपनी अभी तक यहां से एक ग्राम बॉक्साइट भी नहीं निकाल पाई है.
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