दुर्गाशक्ति का निलंबन सही: अखिलेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि नोएडा की एसडीएम (सदर) रहीं आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन वापस नहीं होगा.
पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा, "निलंबन की कार्रवाई सही है और इसे वापस नहीं लिया जाएगा."
अखिलेश यादव ने इस बात को नकारा कि खनन माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई के कारण दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित किया गया है.
उन्होंने कहा, "पहली बात तो ये है कि कोई खनन का मामला नहीं था जिसकी वजह से कार्रवाई हुई है. सदभावना बनाए रखने की जितनी ज़िम्मेदारी सरकार की है उतनी ही ज़िम्मेदारी अधिकारियों की भी है. यदि कोई सदभावना को ख़राब करने का काम करेगा या किसी के काम से वातावरण ख़राब होता है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."
'कार्रवाई सही है'
खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश ने कहा, "सरकार भी इस पक्ष में है कि अवैध खनन न हो. जिसके पास अनुमति है वही खनन कर पाए. इससे पहले भी अधिकारियों ने खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है उनका निलंबन नहीं किया गया."
मस्जिद की दीवार गिराए जाने के संबंध में अखिलेश ने कहा, "गरीब मुसलमान चंदा इकट्ठा करके मस्जिद बना रहे थे. दीवार बनी हुई थी. बिना किसी से राय मशविरा लिए दुर्गाशक्ति ने दीवार गिरा दी. इससे माहौल ख़राब हो सकता था."
मुख्यमंत्री के मुताबिक़ 'सांप्रदायिक ताक़तें इसका फायदा उठा सकती थीं'.
उन्होंने कहा, "सांप्रदायिक सदभाव बनाने की जितनी ज़िम्मेदारी सरकार की है उतनी ही अधिकारियों की भी है. इस मामले में निलंबन की कार्रवाई बिलकुल सही है."
डीएम की रिपोर्ट
नोएडा के डीएम रविकांत सिंह की रिपोर्ट में दुर्गाशक्ति नागपाल को क्लीन चिट दिए जाने के संबंध में अखिलेश ने कहा कि सिर्फ डीएम की ही रिपोर्ट नहीं आई है बल्कि 'हमारे पास स्थानीय खुफ़िया यूनिट की भी रिपोर्ट है.'
अखिलेश ने इस मामले में विपक्ष पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया.
इससे पहले बीबीसी से बातचीत में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा था कि अधिकारी भी सांप्रदायिक मानसिकता से कार्य कर रहे हैं. यदि डीएम ने दुर्गाशक्ति को क्लीनचिट दी है तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जानी चाहिए. नरेश अग्रवाल ने भी खनन के मामले को पूरी तरह गलत बताया.
वहीं नोएडा के डीएम रविकांत सिंह ने पूरे प्रकरण पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
विपक्ष का निशाना

इससे पहले बुधवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, "उत्तर प्रदेश में आपराधिक तत्वों का राज चल रहा है जिसका शिकार उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ अपने कार्यों के प्रति निष्ठावान और ईमानदार अफ़सर भी बन रहे हैं."
भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि 'एक ईमानदार अफ़सर पर ग़लत कार्रवाई की गई है और पूरा देश दुर्गाशक्ति नागपाल के साथ है'.
2009 बैच की आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को पिछले दिनों निलंबित कर दिया गया था. सरकार की ओर से इसकी वजह नोएडा के एक गांव में मस्जिद की दीवार गिराने की कथित कार्रवाई बताई गई थी.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों के मुताबिक दुर्गाशक्ति नागपाल खनन माफ़िया के खिलाफ़ सख़्ती से कार्रवाई कर रहीं थी जिस कारण दीवार का बहाना बनाकर उनका निलंबन किया गया.
आईएएस एसोसिएशन साथ
गुरुवार को ऑल इंडिया आईएएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री वी नारायणसामी से मुलाकात की और दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन रद्द करने की माँग की.
एसोसिएशन के मानद सचिव संजय आर भूस रेड्डी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने उन्हें दुर्गाशक्ति को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है.
मुलाक़ात के बाद भूसरेड्डी ने पत्रकारों से कहा, "मंत्रीजी ने हमें भरोसा दिया है कि वे सभी तथ्यों की जाँच करेंगे और न्याय दिलाएंगे."
4737 सदस्यों वाली आईएएस एसोसिएशन ने दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन तुरंत रद्द किए जाने की माँग की है.
सुनवाई
इस बीच आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति के निलंबन के खिलाफ़ दायर याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में दो अगस्त को होगी. ये याचिका लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर नूतन ठाकुर ने दायर की है.
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