उमा भारती: विवादों से भरा व्यक्तित्व, प्रभावशाली नेतृत्व

भारतीय जनता पार्टी की नेता उमा भारती की गिनती अपने दल के करिश्माई नेताओं में होती है. साथ ही कई विवादों में भी उनका नाम आता रहा है.
राम मंदिर आंदोलन के अग्रदूतों में से एक रहीं <link type="page"><caption> उमा भारती</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/02/120222_uttarpradesh_umabharti_ns.shtml" platform="highweb"/></link> न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और हिंदुत्व का चेहरा मानी जाती रही हैं बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रतिनिधित्व करती रही हैं. <link type="page"><caption> रामजन्म भूमि आंदोलन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/09/100930_ayodya_backgrounder_vv.shtml" platform="highweb"/></link> में भी उन्होंने आगे बढ़ कर हिस्सा लिया था.
भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख प्रचारकों में से एक रहीं उमा भारती अपने उग्र भाषणों के ज़रिए बार-बार पार्टी के लिए अनेक लोगों के वोट को खींचने का काम करती रही हैं. उनकी गिनती भाजपा के उन नेताओं में होती है जो ज़मीनी राजनीति और पार्टी के कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े रहे हैं.
<bold>(उमा भारती सोमवार शाम चार बजे<link type="page"><caption> बीबीसी हिंदी के फेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर लाइव चैट में हिस्सा लेंगी. अपने सवाल भेजिए बीबीसी हिंदी फेसबुक पर और bbchindi.letters@bbc.co.uk पर. अपने नाम के साथ सवाल संक्षिप्त और सटीक रखें.)</bold>
उमा भारती बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी रहीं. वो शुरू से ही एक अच्छी वक्ता रही हैं और संघ परिवार में उनकी इस कालबियत को खूब तराशा गया.
उमा भारती ने एक जगह कहा था कि उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी गई कि वो संन्यास को छोड़ें और शादी करें.
एक समय भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रभावशाली नेता माने जाने वाले गोविंदाचार्यऔर उनके क्या संबंध थे, इसे लेकर भी काफ़ी चर्चा रही.
कभी अंदर कभी बाहर
मध्य प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार को बेदखल करने का श्रेय भी उमा भारती को ही जाता है. साल 2003 के चुनावों में भारी जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की ओर से उमा भारती मध्य-प्रदेश की मुख्यमंत्री बनाई गईं.

उमा भारती को 2004 में पार्टी से निलंबित किया गया था. पार्टी की एक बैठक के दौरान उन्होंने आडवाणी के भाषण के बीच में उन्हें टोका था और फिर नाराज़ होकर बैठक से वॉकआउट किया था.
आडवाणी के खिलाफ उनकी बयानबाजी को देखते हुए भाजपा ने उमा भारती को पार्टी से निलंबित कर दिया था.
हालांकि जल्द ही वर्ष 2005 में उनकी पार्टी में वापसी हो गई.
बाद में उसी साल शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का विरोध करने पर उमा भारती को पार्टी से निकाल दिया गया. उन्हें मदनलाल खुराना और संघप्रिय गौतम जैसे पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की सहानुभूति प्राप्त थी लेकिन इसका उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ.
उन्हें भारतीय जनशक्ति पार्टी के नाम से अपना खुद का राजनीतिक दल बनाया, लेकिन चुनावी मैदान में उन्हें कोई ज्यादा कामयाबी नहीं मिली.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक का एक वर्ग और कुछ भाजपा नेता उनकी भाजपा में वापसी के लिए प्रयास करते रहे लेकिन न तो खुद उमा भारती ने और न ही पार्टी में उनके आलोचकों ने इन पर खास ध्यान दिया.
जुलाई 2007 में उन्होंने सेतुसमुदंरम परियोजना को लेकर एक हफ्ते का अनशन किया. उनका मानना है कि इस सेतु को बचाया जाना चाहिए.
बहरहाल जून 2011 में उनकी भाजपा में वापसी हुई और उन्हें उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी में नई जान फूंकने की जिम्मेदारी दी गई.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, हालांकि खुद उमा भारती महोबा जिले के चरखारी से चुनाव जीतीं.
नवंबर 2011 में जब भारत सरकार ने मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत और सिंगल ब्रांड में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी तो उमा भारती ने इसका विरोध किया.
मोदी बनाम आडवाणी
टाइम्स नाऊ चैनल और समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में उमा भारत ने कहा कि लोकप्रियता के आधार पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नहीं माना जा सकता है.
उन्होंने कहा, “भीड़ खींचने की क्षमता आपको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाती है. नरेंद्र मोदी की तरह अगर मैं कहीं जाऊं तो कुछ भीड़ तो आ ही जाएगी. तो आप ये नहीं कह सकते है कि आग भीड़ उनकी तरफ आती है तो वो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.”
दूसरी तरफ उन्होंने टाइम्स नाऊ को दिए इस इंटरव्यू में पार्टी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की तारीफ की. उन्होंने कहा, “हर किसी की तुलना आडवाणी जी से नहीं की जा सकती है.”
दूसरी तरफ पीटीआई के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “बहुत सारे लोगों को बैठ कर ये फैसला करना होगा कि कौन प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होना चाहिए. अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी ऐसे नेता हैं जो पद पर हो या न हो, लेकिन उन्होंने बहुत ज्यादा योगदान दिया है. उनकी अहमियत कम नहीं होगी. आडवाणी तो संत हैं.”
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