सेक्स वर्कर्स के बीच से अमरीका तक

श्वेता कट्टी
    • Author, वैभव दीवान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई

18 साल की उम्र और आँखों मे कई सपने लिए श्वेता कट्टी तैयार हैं अमरीका की उड़ान भरने के लिए.

मुंबई के जाने माने रेड लाइट एरिया में रहने वाली श्वेता को न्यूयॉर्क के बार्ड कॉलेज से अट्ठाइस लाख रुपए की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई है.

बचपन को याद करते हुए श्वेता बताती हैं, "बचपन में मेरा काफी वक़्त कमाठीपुरा के सेक्स वर्कर्स के बीच गुज़रा, उन्होंने मुझे पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया, ताकि मैं पढ़-लिखकर उस माहौल से निकल सकूँ और बड़ी होकर उन्हें भी बाहर निकालूँ."

श्वेता का परिवार आज भी कमाठीपुरा में रहता है जहाँ उनकी माँ फैक्ट्री में काम करती हैं और 5500 रुपए प्रति माह कमाती हैं.

अपने सौतेले पिता के बारे मे बताते हुए श्वेता ने कहा "वह एक शराबी है जो घर पर मार-पिटाई और झगड़े करते थे, उनके रहते मैं कभी ठीक महसूस नहीं करती थी."

बचपन में तीन बार यौन शोषण का शिकार हुई श्वेता, सिर्फ़ नौ साल की थी जब पहली बार उनके किसी क़रीबी ने ही ये हरकत की थी.

अपने नाम से विपरीत श्वेता ने बचपन से ही अपने रंग के कारण काफी भेदभाव सहा. वह बताती हैं कि स्कूल में उन्हें बच्चे गोबर कहकर चिढ़ाते थे.

अपना आत्मविश्वास खोती जा रही श्वेता को स्कूल में किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से डर लगने लगा था.

लौटा आत्मविश्वास

श्वेता कट्टी
इमेज कैप्शन, एक गैर सरकारी संस्था से जुड़ना श्वेता के जीवन में काफी बदलाव लेकर आया

16 साल की उम्र में श्वेता की ज़िंदगी में एक नया मोड़ आया जब वह एक गैर-सरकारी संस्था से जुड़ी.

संस्था की संस्थापक रोबिन चौरसिया बताती हैं "श्वेता का हमेशा से अमरीका जाने का सपना था, वह पढ़ाई में ठीक थी और हमारे साथ जुड़कर एक बार फिर उसने आत्मविश्वास पाया."

श्वेता के अनुसार वह ख़ुद से नफ़रत करने लगी थी लेकिन इस संस्था से जुड़कर उन्होंने खुद से प्यार करना सीख लिया था, उन्हें अपने बैकग्राउंड की अहमियत पता चली.

अमरीकी मैगज़ीन न्यूज़वीक ने इस साल के अप्रैल अंक में पाकिस्तान की मलाला यूसुफज़ई के साथ श्वेता का नाम भी उन महिलाओं में शामिल किया था जो पच्चीस साल से कम उम्र की हैं और समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है.

कैसी मिली छात्रवृत्ति

श्वेता कट्टी
इमेज कैप्शन, श्वेता अपने दोस्तों के साथ

बार्ड कॉलेज अमरीका के शीर्ष दस महँगे कॉलेजों में से एक है. यहाँ चार साल की स्नातक डिग्री के लिए लगभग 30 लाख रुपए लगते हैं लेकिन श्वेता को यहाँ पढ़ने के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति मिली है.

श्वेता ने बताया कि किस तरह वह इंटरनेट पर अमरीकी विश्वविद्यालय के बारे में सर्च करती रहती थी. फिर एक कांफ्रेंस मे वह इस कॉलेज के पूर्व छात्र से मिली जिन्होंने बार्ड कॉलेज मे श्वेता के नाम की सिफारिश की.

कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों का साथ न छोड़ने वाली श्वेता कट्टी की कहानी ने कॉलेज के एडमिशन अफसरों का दिल छू लिया और साथ ही जब उनका नाम न्यूज़वीक पत्रिका में आया तो बार्ड कॉलेज ने सहर्ष छात्रवृत्ति के लिए स्वीकृति दे दी.

अमरीका की प्रशंसा करते हुए श्वेता ने कहा "वहाँ आपके बैकग्राउंड का ख़्याल रखा जाता है, मैं भारत की किसी यूनिवर्सिटी से ये उम्मीद भी नहीं कर सकती की वो मेरे हालात देखकर मुझे दाखिला देंगे."

आने वाले चार साल

कमाठीपुरा
इमेज कैप्शन, मुंबई का कमाठीपुरा इलाका एशिया का मशहूर रेड लाइट इलाका है.

आने वाले चार सालों को लेकर श्वेता बहुत उत्साहित हैं और वह अमरीका में मनोविज्ञान की पढ़ाई करना चाहती हैं.

श्वेता का सपना है की वह भारत वापस आकर मुंबई के कमाठीपुरा रेड लाइट एरिया में एक क्लीनिक खोलें जहाँ वह शोषण का शिकार होती महिलाओं की मदद कर सकें.

भारत मे देह व्यापार को कानूनी वैधता देने का पक्ष लेते हुए श्वेता कहती हैं, "इसको रोका नहीं जा सकता क्योंकि गैरकानूनी रूप से चल रहे इस धंधे में क़ानून के ही बहुत लोग शामिल हैं. इसे लीगल करने से सेक्स वर्कर्स को अपने अधिकार मिलेंगे और वे एक बेहतर जीवन जी पाएंगे."

श्वेता के मुताबिक साक्षरता और बराबरी के मौके अगर सबको मिले तो एक बेहतर हिंदुस्तान बनाया जा सकता है.

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