अमरीका में मोदी के लिए वीज़ा 'मांगना शर्मनाक'

राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह का अमरीका जाकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वीज़ा मांगना शर्मनाक है.
अमरीकी दौरे पर गए राजनाथ सिंह ने कहा है कि वो मोदी को वीज़ा न दिए जाने का मुद्दा अमरीका सरकार के सामने उठाएंगे.
गुजरात में 2002 के दंगों के चलते अमरीका ने मोदी को कई साल से अपना वीज़ा नहीं दिया है.
राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब समेत कई सांसदों ने अमरीकी प्रशासन को चिट्ठी लिख कर मोदी को वीज़ा दिए जाने पर लगी रोक को बरकरार रखने की अपील की है.
वीज़ा किस आधार पर
बीबीसी से बातचीत में अदीब ने कहा कि उन्होंने अमरीकी प्रशासन को 2012 में गुजरात विधानसभा चु्नाव के समय तब चिट्ठी लिखी थी जब अमरीका और कई यूरोपीय देशों ने मोदी को वीज़ा दिए जाने के संकेत दिए थे.
उन्होंने कहा, “हमने ब्रितानी प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति को पत्र लिखा था कि आपने अगर मानवाधिकार हनन को वजह बताते हुए नरेंद्र मोदी को दस साल तक वीज़ा नहीं दिया तो आप अब उन्हें वीज़ा किस आधार पर देने जा रहे हैं.”
अदीब के अनुसार उन्हें अब तक इसका जवाब नहीं मिला. अपने अमरीकी दौरे में जब राजनाथ सिंह ने ये मुद्दा फिर उठाया तो उन्होंने अमरीका सरकार को उस पुराने पत्र को फिर से फैक्स कर दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस तरह के दो पत्र अमरीकी प्रशासन को भेजे गए हैं. इनमें 26 दिसंबर 2012 को लिखे पत्र पर 25 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं जबकि पांच दिसंबर 2012 को लिखे अन्य पत्र पर 40 लोकसभा सांसदों ने मोदी को वीज़ा न दिए जाने की पैरवी की.
रविवार को न्यूयॉर्क में एक प्रेस कांफ्रेस में राजनाथ सिंह ने कहा था कि वो मोदी को वीज़ा दिए जाने पर रोक को हटाने के लिए अमरीकी अधिकारियों से बात करेंगे.
'भूल गए होंगे येचुरी'

राजनाथ सिंह पहले ही मोदी को आम चुनावों के लिए बीजेपी का प्रमुख नियुक्त कर चुके हैं और मोदी के समर्थक उन्हे पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की मांग उठाते रहे हैं.
उधर अदीब अमरीका में जाकर मोदी को वीज़ा की मांग उठाने पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है, “ये एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए शर्मनाक बात है कि उसका अध्यक्ष अमरीका जाकर कहे कि मेरे एक आदमी को वीज़ा दे दीजिए.”
इस बीच सीपीएम नेता सीताराम येचुरी और सीपीआई नेता एस अच्युतन ने मोदी के सिलसिले में अमरीकी सरकार को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर से इनकार किया है.
इस पर अदीब का कहना है, “हस्ताक्षर की प्रति मेरे पास है. ये छह महीने पुराना पत्र है, हो सकता है कि सीताराम येचुरी इस बारे में भूल गए होंगे. हम पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सभी दोस्तों (सांसदों) को पत्र की प्रति भेज देंगे, ताकि उन्हें इसकी याद आ जाए.”
कुछ महीने पहले यूरोपीय संघ का एक शिष्टमंडल मोदी से मिला था जिसे उन्हें लेकर यूरोपीय नीति में बदलाव के संकेत तौर पर देखा गया. हालांकि मोदी को वीज़ा दिए जाने पर कुछ नहीं कहा गया.
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