कैसे सुलझेंगे छपरा मामले से उपजे कड़वे सवाल?

मिड डे मील
    • Author, वंदना शिवा
    • पदनाम, खाद्य विशेषज्ञ

बिहार के छपरा में 23 बच्चों की मृत्यु एक उदाहरण है कि जमीनी स्थिति कितनी भयानक है.

ये मामला केवल आधारभूत ढांचे के अभाव का नहीं है. ये बच्चे भी ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक से मरे हैं.

हम कीटनाशक का जितना प्रयोग करते जा रहे हैं उतना ही खतरा बढ़ता जा रहा है. धीरे-धीरे हर जगह लोग मर रहे हैं.

हाँ, कभी कीटनाशक से बड़ी तादाद में मृत्यु होती हैं जैसा कि भोपाल में हुआ था, तो कभी छपरा जैसे मामले देखने को मिलते हैं.

मैंने देखा है कि भारत में किसान जिस बर्तन में कीटनाशक घोलते हैं उसी में ही पानी पी लेते हैं. भारत में कीटनाशक को जहर नहीं दवा कहा जाता है. कीटनाशक दवा.

योजना या प्रोपेगेंडा

लोगों को कीटनाशकों के बारे में गुमराह कर दिया गया है. उन्हें लगता है कि यह कोई बहुत अच्छी चीज है.

इतने बड़े देश में इतनी बड़ी (मिड डे मील) परियोजना एक ही तरीके से सुरक्षित रूप से चल सकती है कि यह लोकतांत्रिक तरीके से नियंत्रित हो और इसका विकेन्द्रीकरण किया जाए ताकि ये सबकी नजर में हो.

सबको पता होना चाहिए कि <link type="page"><caption> बच्चों </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130718_mid_day_meal_soutik_fma.shtml" platform="highweb"/></link>के लिए क्या खाना बन रहा है. लोगों को बताया जाए कि उनके लिए क्या नुकसानदेह है.

बड़ी-बड़ी योजनाएं इसलिए नहीं बनाई जा रही हैं कि लोगों तक अच्छा, स्वास्थ्य, सुरक्षित और <link type="page"><caption> पौष्टिक खाना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130604_waste_food_mgt_ar.shtml" platform="highweb"/></link> पहुँच सके. योजनाएँ इसलिए बनाई जा रही हैं क्योंकि इसके पीछे बड़े राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा हैं.

खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी इसी एजेंडा का एक हिस्सा है. गरीब को 2 रुपए में वो चीज मिल जाएगी जिसके लिए उसे बाजार में 20 रुपए देने होंगे.

नई स्कीम को प्रोपेगेंडा के रूप में लाया जा रहा है. भोजन से जुड़े मामले में यह जीवन-मरण का सवाल होता है.

विकेन्द्रीकरण जरूरी

विकेन्द्रीकृत व्यवस्था बनानी होगी. सरकार खाद्य क्षेत्र को केंद्रीकृत कर रही है.

सरकार खाद्य सुरक्षा तभी सुनिश्चित कर सकती है जब यह किसानों का सशक्तिकरण किया जाए.

ब्राजील में बेलाहारजान्टे जगह है. उन्होंने वहाँ कुपोषण दूर कर दिया है. उन्होंने किसानों को शहर में जगह दी जहाँ वह सीधे अपना जैविक उत्पाद बेच सकें. किसानों ने सीधे अपना उत्पाद बेचा इसलिए लोगों को कीटनाशकमुक्त खाना सस्ते में मिला और किसानों को भी मुनाफा हुआ.

सरकार केवल खाद्य सुरक्षा का केन्द्रीकरण ही नहीं कर रही है बल्कि इसे खाद्य क्षेत्र की पाँच बड़ी ताकतों के हाथ में सौंप रही है. जब भोजन से पैसे का गठजोड़ होगा तो ऐसे ही <link type="page"><caption> बच्चे मरेंगे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130718_chapra_death_cremation_fma.shtml" platform="highweb"/></link>.

अन्न उपजाओ

खाद्य सुरक्षा : सामुदायिक जैविक खेती को देना होगा बढ़ावा.

खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है कि खाद्यान्न उगाया जाए. जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने कहा था कि अन्न और उगाओ. उनके जमाने में मंत्रियों के बंगलों में अन्न उपजाया जा रहा था.

हमें हर स्कूल में अन्न उपजाना चाहिए. यदि माफिया और बिल्डर को जमीन दे सकते हैं तो हर गाँव में हर महिला समूह को सामुदायिक खेती के लिए दो-तीन एकड़ जमीन क्यों नहीं दे सकते. हर गाँव में खाद्य सुरक्षा के गोदाम होने चाहिए.

हमें किसानों को उनके उत्पादों की सही कीमत देनी होगी. ऐसा नहीं हुआ तो हमें बाहर से खराब खाद्य पदार्थ मंगाना होगा. ऐसी कंपनियों को भोजन में कीटनाशक होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. खेती खत्म होती जाएगी. हम गंदा अनाज आयात करेंगे.

इस त्रासदी की वजह कीटनाशक है. इससे बचने के लिए हमें जैविक खाद्य की तरफ मुड़ना होगा. यह हमारे लिए विलासिता की वस्तु नहीं है. यह हमारे जीवन की जरूरत है.

बीबीसी संवाददाता स्वाति बक्शी से बातचीत पर आधारित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)