हिरणों को बचाने के लिए कुत्तों की नसबंदी

हरियाणा में फ़तेहाबाद जिले के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन हिरणों को बचाने के लिए आवारा कुत्तों की नसबंदी कर रहा है.
वहाँ प्रस्तावित परमाणु संयंत्र की जमीन की सुरक्षा के लिए लगाई गई कंटीली तारों की बाड़ में फँसकर पिछले तीन दिनों में चार हिरणों की मौत हो गई है. बताया जाता है कि तारों में फँसे हिरणों पर आवारा कुत्तों ने हमला किया जिससे उनकी मौत हो गई थी.
रविवार सुबह भी दो हिरण मृत पाए गए थे, जिसके बाद ग्रामीणों ने बडोपल गाँव में हिरणों के शव रख दिन भर प्रदर्शन किया.
वन्य जीव प्रेमियों के एक सात सदस्यीय दल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर तारों की बाड़ हटाने की माँग की थी. जानवरों की सुरक्षा न किए जाने की स्थिति में प्रदर्शन और तेज करने की चेतावनी भी दी गई थी.
<link type="page"><caption> बाढ़ में सैकड़ों जानवरों की मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/07/120705_assam_animals_sm.shtml" platform="highweb"/></link>
ज़िले के एसडीएम बलजीत सिंह ने बीबीसी को बताया, "प्रशासन वन्य जीव प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करता है और हम जीवों की सुरक्षा में जुटे हैं. फिलहाल हम आवारा कुत्तों को पकड़ रहे हैं ताकि उनकी नसबंदी कर उन्हें कहीं ओर छोड़ा जा सके."
'कम होगी आक्रामकता'
बलजीत सिंह ने कहा, "हमारे पशु विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक नसबंदी के बाद कुत्तों की हिंसक प्रवृति कम हो जाती है और वे झुंड में रहना भी कम कर देते हैं."
फ़तेहाबाद मैदानी इलाका है और वहाँ आवारा कुत्तों को पकड़ना आसान नहीं है. सोमवार शाम तक प्रशासन लगभग दो दर्जन आवारा कुत्तों को पकड़ने में ही कामयाब रहा.
अखिल भारतीय जीव रक्षा सभा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर बालू ने बीबीसी को बताया, "बिश्नोई धर्म के लोग जीवों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम किसी भी जीव की हत्या नहीं कर सकते चाहें वो साँप हो या शेर. आवारा कुत्ते यहां हिरणों और नीलगायों के लिए ख़तरा बन गए हैं. उनकी नसबंदी कराई जा रही है. नसबंदी के बाद उनकी ताक़त कम हो जाएगी और वह हमला नहीं कर सकेंगे."
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नसबंदी ही विकल्प

बताया जाता है कि बडोपल गाँव के आसपास करीब 600 हिरण रहते हैं. वहाँ नीलगाय भी बड़ी संख्या में हैं. परमाणु संयंत्र की जमीन पर लगाई गई बाड़ में अक्सर जीव फँस जाते हैं.
एसडीएम बलजीत सिंह ने बताया, "जिला प्रशासन ने एनपीसीआईएल (भारतीय परमाणु पॉवर कार्पोरेशन) के अधिकारियों से बात की है. वे बाड़ में जगह-जगह निकलने के लिए रास्ता छोड़ेंगे ताकि कोई जीव फँस न पाए."
जानवरों के डॉक्टर नरेंद्र ठुकराल कहते हैं, “मौजूदा कानून के मुताबिक हम न कुत्तों को मार सकते हैं और न ही उन्हें पकड़कर कहीं और छोड़ सकते हैं. फिलहाल हमारे पास नसबंदी का ही विकल्प है. इससे तीन-चार साल बाद आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आएगी जिससे अन्य जीवों पर हमले कम हो सकेंगे.”
फिलहाल प्रशासन हिरणों की सुरक्षा के लिए कुत्तों की नसबंदी में जुटा है. कुत्तों को पकड़ने में स्थानीय युवा भी प्रशासन की मदद कर रहे हैं.
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