उत्तराखंड: '18 साथी नदी में बह गए, बस मैं ज़िंदा बचा'

- Author, शालिनी जोशी
- पदनाम, देहरादून से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
उत्तराखंड की आपदा में जान-माल की क्षति का आंकड़ा विकराल रूप से बढ़ता जा रहा है. अब एक ही सवाल उठ रहा है कि आख़िर ये गिनती कब ख़त्म होगी.
अब तक सरकारी आंकड़े 100 से कम लोगों की मौत बता रहे थे, लेकिन शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इससे पांच गुना अधिक लोगों की मौत की बात कही. आपदा का पैमाना देखकर इसकी आशंका पहले ही जताई जा रही थी.
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि कम से कम 550 लोगों के शव देखे गए हैं. उनके अनुसार अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों से मिल रही सूचनाओं के बाद राज्य सरकार इस नतीजे पर पंहुची है.
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार करीब 400 लोग घायल हैं और 334 लोग लापता हैं.
लापता लोगों के जीवित होने को लेकर भी आशंकाएं हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आए लोगों का कहना है कि उनका इस एक हफ्ते में अपने परिजनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है.
'काश! मां ज़िंदा हो'
अपनी माँ को ढूँढते हुए देहरादून पंहुचे अंकुर कापड़िया हताशा भरी आवाज़ में कहते हैं काश, मेरी मां जीवित हो.
अपने भाई का पता लगाने के लिए बरेली से आए एक व्यक्ति ने बताया कि 16 तारीख को 8 बजे उनकी आखिरी बात हुई थी उसके बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया है.
एक साथ घूमने आए 19 लोगों में से एक व्यक्ति जीवित बचकर देहरादून आया है और उसका कहना है कि बाकी सब नदी के बहाव में बह गए.
इस बीच सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान मुस्तैदी से राहत और बचाव में लगे हुए हैं.

राहत और बचाव कार्य
जोशीमठ-बद्रीनाथ, रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड और उत्तरकाशी गंगोत्री राजमार्गों को छोड़कर सभी बंद रास्ते अब खुल गए हैं. हवाई मार्ग के अलावा सड़क के रास्ते भी लोगों को निकाला जा रहा है.
प्रशासन का दावा है कि फंसे हुए 73,000 लोगों को विभिन्न सुरक्षित स्थानों में पंहुचा दिया गया है लेकिन अभी भी 32,000 फँसे हुए हैं.
ये जानकारी देते हुए राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने कहा, "हमारी निगाह में सभी बराबर हैं और सबको सुरक्षित पंहुचाना हमारी जिम्मेदारी है."
आंकड़ों के अनुसार करीब 1751 घर धराशायी हो गए हैं, 147 पुल ध्वस्त हो गए हैं और 1307 सड़कों को भारी नुकसान पंहुचा है.
टेलीफोन सेवाएं बहाल
टेलीफोन सेवाएं अधिकांश जगहों में बहाल कर दी गई है. और जैसे ही संपर्क कायम हुआ है लोग फोन करके अपने-अपने इलाकों की दुर्दशा बयान कर रहे हैं.
किसी ने शवों को बहते देखा है, किसी गांव के कई परिवार तबाह हो गए, कई बेघर हो गए, कई लापता हैं तो कहीं राशन खत्म हो गया है तो कहीं बीमारियां फैल रही हैं और कहीं महामारी की आशंका हैं.
अगस्त्यमुनि से ऐसे ही एक छात्र निशांत ने जानकारी दी कि गंगोहटी गांव के हर परिवार से 4-5 लोग मौत के मुंह में समा गए हैं.
इस बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिये देहरादून आ गए हैं. उन्होंने इसे राष्ट्रीय आपदा कहा है.
उत्तरप्रदेश और अन्य राज्य सरकारों ने भी संकट की इस घड़ी में उत्तराखंड की कई तरह की मदद की घोषणा की है .
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