अब ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने युवती को थप्पड़ मारा

महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ने के साथ ही पुलिस के रवैये पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं
इमेज कैप्शन, महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ने के साथ ही पुलिस के रवैये पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं

उत्तर प्रदेश में ग़ाज़ियाबाद के एक पुलिस थाने में देर रात को पुलिसकर्मियों ने एक युवती से अभद्रता की और उसे थप्पड़ मारा.

यह सारा वाकया कैमरे में कैद हो गया और इसके बाद यूपी पुलिस की आलोचना की जा रही है.

हालांकि <link type="page"><caption> उत्तर प्रदेश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130410_sc_bulandshahar_rape_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के <link type="page"><caption> वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130426_delhi_girl_slap_va.shtml" platform="highweb"/></link> ने <link type="page"><caption> पुलिसकर्मियों के व्यवहार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130426_rape_law_change_aa.shtml" platform="highweb"/></link> पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

युवती और उसके पुरुष मित्र के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है.

थाने में पिटाई

पुलिस का कहना है कि ग़ाज़ियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में युवती अपने एक पुरुष मित्र के साथ गाड़ी में शराब पी रही थी.

स्थानीय लोगों की शिकायत पर साहिबाबाद थाने की पुलिस पहुंची और लड़की पुलिस और उसके पुरुष मित्र को गालियां देते हुए थाने ले आए.

वीडियो फुटेज में साफ़ दिखाई देता है कि थाने में एक स्थानीय महिला ने युवती के साथ अभ्रदता की और उसे थप्पड़ मारा.

युवती के प्रतिक्रिया करने पर पुलिसकर्मी उन्हें रोकने के लिए उठते हैं और इसी क्रम में एक पुरुष पुलिसकर्मी ने युवती को थप्पड़ मारा.

पीड़ित युवती का कहना है कि पुलिस ने उन्हें आपत्तिजनक बातें कहीं और विरोध करने पर पीटा भी.

यूपी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कानून और व्यवस्था, अरुण कुमार का कहना है कि लोगों की शिकायत पर उन्हें गिरफ़्तार किया गया और उनके ख़िलाफ़ धारा 160, 294 आईपीसी और शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया है.

भारत के कानून के अनुसार किसी भी महिला को शाम ढलने के बाद हिरासत में नहीं रखा जा सकता है.

आलोचना

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने शराब पी भी थी तो पुलिस नशा उतरने का इंतज़ार कर सकती थी, उन्हें डॉक्टर के पास ले जा सकती थी. यह जो थप्पड़ मारने की घटना हुई है उस पर उत्तर प्रदेश सरकार को ज़रूर कुछ कदम उठाना चाहिए.”

नेशनल फ़ेडरेशन फॉर इंडियन वीमेन की महासचिव एनी राजा कहती हैं, “कानून-व्यवस्था लागू करने वाली कोई संस्था अगर अपना काम ठीक से नहीं कर पाती तो कानूनन उनके खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन सवाल यह है कि ये पुलिसकर्मी इसके बारे में कितना जानते हैं.”

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी मानती हैं कि सार्वजनिक स्थल पर शराब पीना ग़लत है लेकिन वह पुलिस के पिटाई करने का समर्थन नहीं करतीं.

पुलिस के बर्ताव पर वह कहती हैं, “पुलिस विभाग के सामने बहुत बड़ी चुनौती है. इसे पूरी तरह सब कुछ बदलने की जरूरत पड़ेगी, लगातार ट्रेनिंग, निगरानी, मानसिकता बदलने के लिए काम करना होगा. इसमें बहुत समय लगेगा और तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी.”

उन्होंने कहा कि यह भी कहती हैं कि यह हमारे सामाजिक बर्ताव का हिस्सा है. पितृसत्तात्मक समाज में चिल्लाना, गाली देना, मारना एक उपसंस्कृति की तरह मौजूद है. हमें पूरे समाज की मानसिकता को ही बदलना होगा.

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