पहले सोच बदले, तभी होगा कानून कारगर

बीते सप्ताह पांच साल की बच्ची के साथ <link type="page"><caption> बलात्कार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130423_india_rape_stats_ns.shtml" platform="highweb"/></link> के बाद भारत में एक बार फिर <link type="page"><caption> विरोध प्रदर्शन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130421_child_rape_protest_sp.shtml" platform="highweb"/></link> हो रहे हैं.
मौजूदा विरोध पिछले साल दिल्ली की एक छात्रा के साथ हुए जानलेवा गैंगरेप के बाद उपजे आक्रोश की प्रतिध्वनि है.
दिल्ली की एक गरीब बस्ती में दो कमरों वाले एक घर के सामने एक छोटी सी लड़की अपनी बड़ी बहन के साथ खेल रही थी.
वह केवल चार साल की है. लेकिन मकान मालकिन के पति ने कथित रूप से बच्ची यौन शोषण किया.
डरावना अनुभव
जब लड़की के पिता मामला दर्ज कराने के लिए <link type="page"><caption> पुलिस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130422_delhi_police_rape_ns.shtml" platform="highweb"/></link> स्टेशन पहुंचे तो उनकी बच्ची को एक डरावने अनुभव से गुजरना पड़ा.
उन्होंने बताया, “उन्होंने उसके साथ एक अपराधी जैसा बर्ताव किया.”
उन्होंने कहा, “तीन वर्दीधारी पुलिसकर्मी उसे एक कमरे में ले गए और घंटों तक सवाल जवाब करते रहे. वो लड़की से विस्तार से अपनी आपबीती सुनाने को कह रहे थे.”
यह ऐसा अनुभव है जिससे यौन उत्पीड़न के शिकार कई पीड़ितों को गुजरना पड़ता है, खासतौर से गरीब परिवार के लोगों को.
पहले तो पुलिस ने मदद से इनकार कर दिया. लेकिन बाद में किसी तरह मामला दर्ज हो गया. हालाँकि, अभियुक्त जमानत पर रिहा हो गया है.
बच्ची के पिता का कहना है, “हमें कानून की समझ नहीं है. हमारा पक्ष रखने के लिए वकील का इंतजाम करना भी काफी मुश्किल है.” लेकिन न्याय पाने के लिए उनके इरादे मजबूत हैं.
उन्होंने बताया कि, “यदि जरूरत पड़ी तो मैं अपना पूरा वेतन खर्च कर दूंगा. पैसे जमा करने के लिए मैं और मेरी पत्नी खून बेचने के लिए भी तैयार हैं. मैं पीछे नहीं हटूंगा.”
यौन अपराध
ऐसे मामले इक्का-दुक्का नहीं हैं. केवल दिल्ली में ही प्रत्येक 18 घंटे में बलात्कार की एक घटना होती है. तीन में से एक पीड़ित बच्चा है. इससे आम लोगों में असुरक्षा का भाव भर रहा है, खास तौर से युवतियों में.
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र अपनी नाराजगी और हताशा के बारे में बातें कर रहे हैं.

कश्मीर से आई छात्रा हाफसा सईद ने बताया, “इस साल मेरे जन्मदिन पर मुझे चाकू और काली मिर्च का स्प्रे दिया गया है.”
भारत में बलात्कारियों को कठोर दंड देने के लिए एक नया कानून पास हुआ है, जिसमें मौत की सजा शामिल है. कानून में पीछा करने, छेड़खानी करने और घूरने के लिए नई सजा का प्रावधान है.
लेकिन कई लोग इस बात से सहमत हैं कि भले ही कानून बदल गया हो, लेकिन नजरिया नहीं बदला है.
रफीउल रहमान ने बताया कि, “बलात्कार यूँ ही नहीं होता है. हम जिस माहौल में रह रहे हैं उसका इससे काफी संबंध है.”
'कानून लागू करने में ढिलाई'
एक अन्य छात्रा श्रेया सिंह ने बताया कि भारतीय समाज आज भी काफी हद तक पुरुष प्रधान और कानून भी उसी के अनुरूप हैं. उन्होंने बताया कि “आपको आज भी इस आधार पर परखा जाता है कि आपने क्या पहना है, आप कैसे दिखते हैं, किसके साथ सोते हैं... जब तक नज़रिया नहीं बदलेगा, कानून कारगर नहीं होगा.”
ठीक ऐसा ही पिछले सप्ताह दिल्ली में पाँच साल की बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के बाद विरोध प्रदर्शन के बाद देखने को मिला. सबके सामने एक पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मार दिया. उसे निलंबित किया जा चुका है.
लेकिन विपक्ष की नेता बृंदा करात ने कहा, "इतना पर्याप्त नहीं है. नए कानून में अपने कर्तव्य का पालन न करने वाले पुलिस अधिकारी के लिए एक साल की सजा का प्रावधान है. इसे लागू क्यों नहीं किया गया.”
सरकार की कोशिश सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और कानूनों में सुधार की है. लेकिन, मौजूदा घटनाएँ बताती हैं कि इतने से ही यह देश महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित हो जाएगा, ऐसा जरूरी नहीं है.












