मोबाइल के सहारे पकड़ा गया कथित बलात्कारी

गिरफ़्तारी के लिए छापे में दिल्ली पुलिस टीम को मदद करने वाले बिहार के कजरा पुलिस थाना प्रभारी आरकेएल दास ने बीबीसी को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कथित तौर पर <link type="page"><caption> बलात्कार</caption><url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130420_police_rape_dp.shtml" platform="highweb"/></link> करने वाले ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है.
बिहार की स्थानीय पुलिस के मुताबिक़ मनोज अपनी ससुराल चिक्नौटा गाँव में छिपा हुआ था. पुलिस ने मनोज के मोबाइल फ़ोन लोकेशन के ज़रिए मनोज के छिपने के ठिकाने का पता लगा लिया.
गिरफ़्तारी के बाद अभियुक्त को शनिवार सुबह मुज़फ्फ़रपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया गया, जहाँ से तीन दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पुलिस मनोज को दिल्ली ले आई.
ज़िले के औराई अंचल निवासी मनोज कुमार ने दो साल पहले प्रेम-विवाह किया था और परिवार के साथ दिल्ली में रहकर मज़दूरी करता है.
कजरा थाना प्रभारी ने बताया कि जब मनोज को गिरफ़्तार किया गया और मुज़फ्फ़रपुर कोर्ट में पेश किया गया, तब वहां जमा भीड़ घिनौनी करतूत पर उसे लताड़ने लगी.
पुलिस के मुताबिक़ मनोज कुमार बार-बार अपनी ग़लती मानकर गिड़गिड़ाता रहा और लोग कह रहे थे कि पूरा मुज़फ्फ़रपुर उसकी हैवानियत पर शर्मिन्दा हुआ है.
बाद में मनोज को मुज़फ्फ़रपुर से पुलिस जीप में बिठाकर पटना लाया गया और पटना से शनिवार दोपहर विमान द्वारा दिल्ली ले जाया गया.
'मरा समझकर छोड़ दिया'
ग़ौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ गांधीनगर इलाक़े में बलात्कार की शिकार हुई पांच साल की बच्ची 40 घंटे तक कमरे में बंद रही और संदिग्ध मनोज कुमार शायद बच्ची को मरा समझकर भाग गया.
पूर्वी दिल्ली के डीसीपी प्रभाकर ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “वो बच्ची क़रीब 40 घंटे कमरे में बंद थी. एमएलसी की रिपोर्ट और मनोज से हुई प्रारंभिक पूछताछ से लगता है कि शायद उसने बच्ची को मरा समझकर छोड़ दिया था.”
उन्होंने बताया कि बच्ची 15 अप्रैल की शाम को लापता हुई थी और मनोज उसी दिन शाम सात बजे घटनास्थल से चला गया था. वो स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से छपरा होते हुए पहले अपने गांव पहुंचा और फिर ससुराल.












