कुडनकुलम संयंत्र को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने <link type="page"><caption> कुडनकुलम परमाणु संयंत्र</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120921_kudankulam_fueling_aa.shtml" platform="highweb"/></link> को सुरक्षित बताते हए उसे शुरू करने की इजाजत दे दी है.
समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ अदालत ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक हित और देश की आर्थिक वृद्धि को देखते हुए यह <link type="page"><caption> संयंत्र बहुत जरूरी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/04/120331_kudunkulum_rn.shtml" platform="highweb"/></link> है.
कुडनकुलम परमाणु संयंत्र शुरू करने को जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने हरी झंडी दी. इस बेंच ने तीन महीने तक चली सुनवाई के बाद अपना फ़ैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.
न्यायालय ने कहा कि देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की ज़रूरत है. कुडनकुलम संयंत्र को सरकार ने लोगों के कल्याण के लिए बनवाया है.
सुरक्षा का सवाल
कु़डनकुलम संयंत्र के सुरक्षा मानकों को चुनौती देते हुए <link type="page"><caption> परमाणु संयंत्र विरोधी कार्यकर्ताओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120913_kudankulam_protest_pp.shtml" platform="highweb"/></link> ने कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थीं.
याचिकाकर्ताओं ने परमाणु कचरे के निपटान, इस संयंत्र के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और इस संयंत्र के आस-पास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ कई अन्य मुद्दे उठाए थे.
इस संयंत्र का संचालन करने वाले न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार ने इसकी सुरक्षा और संरक्षा को लेकर उठाई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया था.
उनका कहना है कि यह परमाणु संयंत्र पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा और चरमपंथी हमले को सहने में सक्षम है.
सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने पिछले साल 13 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए संयंत्र में ईंधन भरे जाने पर स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया था. लेकिन अदालत ने कहा था कि संयंत्र से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन होना चाहिए. उसका कहना था कि इसके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा अहम है.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए परमाणु निशस्त्रीकरण एवं शांति गठबंधन (सीएनडीपी) के पीके सुंदरम ने कहा कि इस देश की लोकतांत्रिक और न्यायिक व्यवस्था किसानों, आदिवासियों समेत बहुसंख्यक जनता की समस्याओं का समाधार कर पाने में असफल है.
उन्होंने कहा कि एक खास तरह के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे देश की एक बड़ी आबादी प्रभावित होगी. परमाणु संयंत्रों में खुद सरकार की ओर से सुझाए गए सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है.
संयंत्र
रूस की सहायता से क़रीब 13 हज़ार करोड़ की लागत से बनाया जा रहा कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र तमिलनाडु के तिरुनेलवेली ज़िले में है.
इस संयंत्र में छह रिएक्टर होंगे. ये भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा संयंत्र होगा. इस संयंत्र की क्षमता एक हज़ार मेगावाट की है.
लेकिन इसके विरोधियों का कहना है कि इस संयंत्र की वजह से मछुआरों और ग्रामीणों को रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. दरअसल 2004 में आई सूनामी के कारण तमिलनाडु का यह तटवर्ती इलाक़ा काफ़ी प्रभावित हुआ था.
प्रदर्शनकारी जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र का हवाला देते हुए इस संयंत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं. लेकिन सरकार उनके डर को गलत बताती रही है. उसका दावा है कि संयंत्र की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया है.












