सुप्रीम कोर्ट:पोर्न साइटें क्यों बढ़ रही हैं?

इंटरनेट पर <link type="page"><caption> अश्लील साइटों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130403_europe_child_porn_fma.shtml" platform="highweb"/></link> की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है और इस संबंध में एक नोटिस जारी की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सोमवार को मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता में सूचना और प्रसारण मंत्रालय और अन्य विभागों को एक नोटिस जारी की गई है. इस नोटिस में कहा गया है कि इंटरनेट पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्रियां लगातार परोसी जा रही हैं.
माता पिता की अनुपस्थिति में बड़ी संख्या में बच्चे इन <link type="page"><caption> साइटों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/04/130411_porn_malware_ra.shtml" platform="highweb"/></link> के प्रति आकर्षित हो रहे हैं.
अपराध में इज़ाफा
नोटिस में कहा गया है कि इन साइटों पर परोसी जा रही अश्लील सामग्रियों से बच्चों के कोमल मन पर बुरा असर हो रहा है. इसमें यह दलील भी दी गई है कि इन्हीं सब कारणों से समाज में अपराध में बढोत्तरी होती है. उल्लेखनीय है कि कमलेश वासवानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए अपील की है कि इंटरनेट पर चल रही इन अश्लील वेबसाइटों पर तुरंत लगाम कसी जाए. पीटीआई के अनुसार न्यायालय ने इसी याचिका पर सुनवाई के तहत केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है.
पोर्न अब इतना आम हो चुका है कि एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ अधिकांश बच्चे 11 साल की उम्र तक इससे किसी न किसी सूरत में परिचित हो चुके होते हैं.
इंटरनेट पर होने वाले सर्च में से 25 फ़ीसद सामग्री पोर्न से संबंधित होती हैं और हर सेकंड कम से कम 30 हज़ार लोग इस तरह की साइट देख रहे होते हैं.
किशोरों के <link type="page"><caption> पोर्न वेबसाइट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130128_twitter_vine_pp.shtml" platform="highweb"/></link> देखने का एक बड़ा नुक़सान उनके भीतर सेक्स को लेकर पैदा हो रही भ्रांतियों के रूप में सामने आ रहा है जो माता-पिता और अभिवावक के लिए सिरदर्द बनती जा रही है.
<link type="page"><caption> भारत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121213_google_search_sunny_toplist_arm.shtml" platform="highweb"/></link> जैसे विकासशील देश में उन बच्चों की संख्या बढ़ रही है जिनके पास निजी कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और स्मार्टफोन मौजूद है और इसीलिए पोर्न साइटों से प्रभावित होने के उनके खतरे भी बढ़ रहे हैं.












