अमित शाह को सुप्रीम कोर्ट से राहत

गुजरात के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी महासचिव <link type="page"><caption> अमित शाह </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/09/120927_amit_shah_bail_vk.shtml" platform="highweb"/></link>को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है.
तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर केस में अमित शाह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले में शाह पर अलग से मुकदमा चलाने की ज़रूरत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर और तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर एक ही साज़िश का हिस्सा है और इसके लिए अलग-अलग मुकदमा चलाने की ज़रूरत नहीं है.
सीबीआई चाहती थी कि इन दोनों मामलों के लिए अमित शाह पर अलग से मुकदमा चले. जिसके खिलाफ शाह ने कोर्ट में याचिका दायर की थी.
एक सप्ताह पहले ही अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया था.
सीबीआई पर आरोप
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी समझे जाने वाले अमित शाह ने सीबीआई पर दुर्भावना के तहत काम कर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया था.
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में ज़मानत पर रिहा शाह का आरोप था कि सीबीआई उन्हें तुलसी प्रजापति एनकाउंटर मामले में अलग से चार्जशीट दायर कर पुलिस हिरासत में लेना चाहती है.
अमित शाह ने कोर्ट में दावा किया था कि सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति का एनकाउंटर एक ही साज़िश का हिस्सा हैं और एक दूसरे से जुड़े हैं.
लेकिन सीबीआई ने बीते साल नवंबर महीने में तुलसी प्रजापति एनकाउंटर मामले में दायर चार्जशीट में कहा था कि दोनों मामले अलग अलग हैं.
क्या है मामला
सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी का साल 2005 में गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने कथित तौर पर अपरण के बाद <link type="page"><caption> फ़र्जी मुठभेड़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/04/110408_prajapati_encounter_ia.shtml" platform="highweb"/></link> में मार दिया था.
इस एनकाउंटर के 'चश्मदीद गवाह' तुलसीराम प्रजापति को गुजरात पुलिस ने कथित तौर पर बनासकांठा ज़िले में साल 2006 में एनकाउंटर कर मार दिया था.
गुजरात सरकार में गृहमंत्री रहे अमित शाह ने इन दोनों एनकाउंटर में अपना नाम आने के बाद इस्तीफा दे दिया था.












