राहुल को लगता है मोदी से डर :भाजपा

गुरुवार को बिजनेस समूह सीआईआई के सामने राहुल गाँधी के भाषण पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि राहुल 'मोदीफ़ोबिया' से ग्रसित हैं.
करीब एक घंटे चले भाषण में <link type="page"><caption> राहुल गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130123_rahul_gandhi_new_role_arm.shtml" platform="highweb"/></link> ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहानियों का पुलिंदा खोलते हुए आम आदमी की जरूरतों, चिंताओं के चारों ओर ताना-बाना बुना. राहुल के मुताबिक ये सोचना गलत होगा कि कोई एक व्यक्ति इस देश को सभी परेशानियों से निजात दिला देगा.
इस पर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने चुटकी लेते हुए कहा, "राहुल गाँधी के भाषण बेहद फीका और दिशाहीन था. उनकी बातों से मोदी का डर (मोदीफ़ोबिया) साफ नज़र आ रहा था."
राहुल गाँधी के भाषण से पहले उद्योग जगत ने उम्मीद ज़ाहिर की थी कि <link type="page"><caption> राहुल गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130122_rahul_gandhi_soutik_biswas_arm.shtml" platform="highweb"/></link> सरकार की आर्थिक नीतियों और विकास की रफ्तार को बढ़ाने के तरीकों पर अपने विचार की बात करेंगे.
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय व्यापार जगत की ओर से अपनी आर्थिक नीतियों की ओर से कई बार वाहवाही लूट चुके हैं. राहुल गाँधी के लिए ये पहला मौका था कि जब वो उद्योग प्रमुखों के सामने अपनी बात रखने जा रहे थे और इसलिए सभी की निगाहें उनकी ओर थीं.
उन्होंने भारत को एक बेहद जटिल देश बताया औऱ कहा कि भारत चीन से ज्यादा शक्तिशाली है.
सम्मिलित विकास
दरअसल, राहुल गाँधी ने कहा कि कि ये सोचना गलत होगा कि सफेद घोड़े पर सवार कोई व्यक्ति इस देश की समस्याओं का समाधान कर देगा.
राहुल ने कहा, “आप किसी एक व्यक्ति को संपूर्ण शक्तियाँ दें लेकिन वो एक अरब लोगों की समस्याओं को नहीं सुलझा सकता. अगर आप मनमोहन सिंह या किसी और से उम्मीद करते हैं कि वो सभी समस्याओं को सुलझा देगा तो आप उम्मीद करते रहिए.”
सफेद कुर्ता-पैजामा पहने, हाथ में माइक लेकर मंच पर ओबामा और कैमरन की तरह चहल-कदमी करते हुए <link type="page"><caption> राहुल गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/10/121012_rahul_punjab_js.shtml" platform="highweb"/></link> ने बेबाक अंदाज़ में कहा, “हमें अपने बारे में जितना एहसास है, हम उससे ज्यादा शक्तिशाली हैं. न्यूयॉर्क में योग का अभ्यास भारत की शक्ति प्रदर्शित करता है.”
सम्मिलित विकास की बात दोहराते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि भारत की आर्थिक नीति का आधार सहानुभूति होना चाहिए.
राहुल गाँधी ने अर्थ जगत के लोगों को वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को बदलने के लिए धन्यवाद दिया.
आम भारतियों से अपनी मुलाकातों का ज़िक्र करते हुए राहुल ने कहा, “भारत सपनों, आशाओं और चुनौती भरी कल्पनाओं से भरा हुआ है और चुनौती ये है कि इस उर्जा का कैसे सही इस्तेमाल किया जाए.
केंद्र सरकार और राज्यों के बीच के संबंधों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राहुल गाँधी ने कहा कि असली समस्या सत्ता हस्तांतरण की है.
अपने भाषण के दौरान राहुल ने कहा, “हमारे राजनीतिक दल सांसदों और विधायकों के लिए बनाए गए थे न कि गाँव प्रधानों के लिए जो कई समस्याओं को सुलझा सकता है. इन्हें राजनीतिक व्यवस्था में भागीदार बनाना चाहिए.”
समस्याएँ
<link type="page"><caption> राहुल गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120913_rahul_gandhi_arti_vd.shtml" platform="highweb"/></link> ने कहा कि कई समस्याओं को निचले स्तर के लोगों द्वारा ही हल किया जा सकता है और वो यही कोशिश कांग्रेस के भीतर भी कर रहे हैं.
चीन से भारत की तुलना करते हुए राहुल ने कहा कि अवरुद्ध राजनीतिक व्यवस्था ने भारतीय प्रगति को रोक रखा है.
उन्होंने कहा, “चीन एक ड्रैगन है, लोग हमें हाथी कहकर पुकारते हैं लेकिन हम मधुमक्खी का छत्ता हैं. हमें समझना होगा कि हमारी शक्ति कहाँ से आती है.”
उनकी शादी और प्रधानमंत्री बनने पर लग रही अटकलों को राहुल गाँधी ने बेमतलब के सवाल करार दिया और कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि हम व्यवस्था में आम आदमी को कैसे आवाज दे सकते हैं.
राहुल गाँधी के गुरुवार के भाषण के बाद अब सभी की निगाहें आठ अप्रेल को एक और उद्योग समूह फिक्की के सामने नरेंद्र मोदी के भाषण पर होंगी.












