केजरीवाल के पास भीड़ नहीं मगर जज़्बा वही

दिल्ली के उत्तर-पूर्व में सुदंर नगरी नाम की एक बस्ती है जहां आम आदमी <link type="page"><caption> पार्टी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121126_india_kejriwal_aap_party_arm.shtml" platform="highweb"/></link> के <link type="page"><caption> अरविंद केजरीवाल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130329_kejriwal_time_skj.shtml" platform="highweb"/></link> एक घर के कमरे में उपवास पर बैठे हैं. एक-एक कर के लोग अंदर उनसे मिलने आ रहे हैं.
एक सिख युवक भी उनमें से एक हैं. लेकिन अधिकतर लोगों की तरह वो केवल केजरीवाल के पैर नहीं छू रहे.
वो कमरे के एक कोने में एक चारपाई पर बैठे <link type="page"><caption> केजरीवाल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130201_kejriwal_targets_sheela_arm.shtml" platform="highweb"/></link> की ओर बढ़े और सीधे खड़े हो कर एकदम फौजी की तरह सलाम करने लगे.
उन्होंने कहा, ''सर, मैं आपको सैल्यूट करता हूँ. आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. मैं आपके साथ हूँ.''
कमज़ोर दिखाई देने वाले केजरीवाल बस हल्के से मुस्कुराते हैं. आज यानी शुक्रवार को उनके <link type="page"><caption> उपवास</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121124_kejriwal_aam_aadmi_as.shtml" platform="highweb"/></link> का सातवां दिन हैं.
वह ज़्यादा बात नहीं कर रहे हैं ताकि उर्जा व्यर्थ न जाए.
दूर दूर से
कोई दिल्ली से, कोई बिहार से, कोई हरियाणा से तो कुछ लोग विदेश से केजरीवाल से मिलने आ रहे हैं.
कोई यह पूछता है कि छह दिन के उपवास के बाद उनका हाल कैसा है तो कोई उन्हें अपने समर्थन का आश्वासन देता है.
केजरीवाल काफ़ी देर तक बैठे रहने के बाद चारपाई पर लेट जाते हैं.
बाहर बारिश शुरु हो चुकी है लेकिन फिर भी ठंड नहीं है हालांकि केजरीवाल अपने ऊपर रज़ाई ओढ़ लेते हैं.
केवल उनका चेहरा ही दिख रहा है और लोग ऐसे ही एक-एक कर के अंदर आ रहे हैं और कोई उनके चरण स्पर्श कर तो कोई उन्हें प्रोत्साहित करता है.
बिजली कर्मचारी भी
एक व्यक्ति की पहचान काफ़ी चौकाने वाली थी. उन्होंने बताया, ''मैं बिजली विभाग से हूँ और केजरीवाल जी के साथ हूँ.''
बहुत सारे लोग ऐसे भी थे जो अपने बिजली के अधिक बिलों से परेशान थे.
गीता नाम की एक महिला ने बताया, ''अब बताइए हमारा डेढ़ लाख का बिल आया है जबकि हम एक बस्ती में छोटे से घर में रहते हैं.''
उनके साथ एक अन्य परिवार था जिनका कहना था कि उनका बिल 70 हज़ार रुपए का आया है.
केजरीवाल 23 मार्च से उपवास पर बैठे हैं और वो काफ़ी कमज़ोर हो गए हैं. केजरीवाल के मुताबिक़ उन्होंने 23 मार्च का दिन इसलिए चुना क्योंकि इसी दिन 1931 में भारत की आज़ादी की लडाई में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी.

हालांकि बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''जब तक दिल्ली के लोग अपने बिजली पानी के बिल देना बंद नहीं कर देंगे तब तक उपवास पर बैठूंगा. हम लोगों से कह रहे हैं कि वो इन नाजायज़ बिलों का भुगतान न करे. चाहे सरकार ज़ुर्माना लगाए या कोई केस दर्ज करे. जब नवंबर में हमारी सरकार आएगी तो सारे मामले वापस ले लिए जाएंगे.''
ग़ैर क़ानूनी?
लेकिन क्या यह ग़ैर-क़ानूनी नहीं है जिसका वो बढ़ावा दे रहे हैं? ''हम बिल्कुल ग़ैर क़ानूनी काम कर रहे हैं. गांधीजी ने यही तो सिखाया है कि अगर क़ानून ग़लत है तो उसका विरोध करें.''
केजरीवाल जिस कमरे में अनशन पर पिछले सात दिन से बैठे हैं वो यहां के बाज़ार में स्थित है. बाज़ार में चहल-पहल रहती है लेकिन आम आदमी पार्टी के इस कार्यक्रम की वजह से यहां माहौल एक त्योहार की तरह है.
केजरीवाल के कमरे के पास बाहर ही कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के एक अहम सदस्य और केजरीवाल के क़रीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया भी बैठे हैं.
उनके पास ही एक काउंटर बनाया गया है जहां लोग वो फ़ॉर्म भरते हैं जिसमें वो पार्टी की मुहिम में उनके साथ होने पर दस्तख़त करते हैं.
3.75 लाख का साथ?
सिसोदिया ने बताया, ''अब तक तीन लाख 75 हज़ार लोग हमारे असहयोग आंदोलन में साथ हैं.''
इसी गली के एक कोने में स्टॉल लगा है जहां पार्टी की टोपी से लेकर किताबें बेची जा रही हैं.
केजरीवाल की किताब स्वराज 40 रुपए में, टोपी पांच रुपए में, स्टिकर पांच में और पोस्टर 15 रुपए में.
किसी ने किताब ख़रीदी, पैसे दिए और जाने लगा तो काउंटर पर बैठी लड़की ने ज़ोर से आवाज़ दी, ''आपका बिल यहीं पर रह गया सर.''
केजरीवाल के अनशन में वो भीड़-भाड़ बिल्कुल नहीं है जो कुछ महीने पहले जंतर मंतर पर नज़र आई थी जब अन्ना हज़ारे और किरण बेदी भी साथ थे. मीडिया है तो सही लेकिन उतनी गिनती में नहीं.
केजरीवाल से सवाल किया तो उनका कहना था, ''हम चाहते ही नहीं कि यहां भीड़ एकत्र हो. इसलिए बार-बार ऐलान कर रहे हैं कि यहां व्यर्थ समय न गंवाएं और फील्ड में जा कर लोगों को इसके बारे में जानकारी दें.''
भीड़ उतनी नहीं है लेकिन जज़्बे में कमी नहीं है. बहरहाल क्या केजरीवाल जानते हैं कि वो टाईम मैग्ज़ीन के सर्वे में सबसे अधिक प्रभावशाली लोगों की सूची में अकेले भारतीय है.
केजरीवाल कहते हैं, ''मुझे इसकी जानकारी नहीं है...किसी भी सूची में आना मेरा मक़सद नहीं है. मेरा मक़सद यह है कि मैं लोगों के काम आ सकूं.''












