क्या भारत ने तोड़ा है वियना समझौता?

भारत और इटली के बीच चल रही राजनयिक तनातनी का असर नई दिल्ली और यूरोपीय संघ के कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ने की संभावना बढ़ गई है.
इटली ने भारत में दो मछुआरों की हत्या के आरोपों का सामना कर रहे अपने दो नौसैनिकों को भारत नहीं भेजने का फ़ैसला किया है जिसके बाद भारत ने इटली के राजदूत के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ के राजदूत को भी तलब किया है.
दो देशों के रिश्तों के बीच जब खटास आती है तो एक दूसरे के राजनयिकों का निष्कासन आम बात है लेकिन किसी विदेशी राजनयिक को देश छोड़कर नहीं जाने देना असामान्य है.
जानकारों का कहना है कि इस मामले में भारत की कार्रवाई वियना समझौते का उल्लंघन है और ऐसा करके उसने अपने राजदूतों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
वियना संधि
वियना संधि के मुताबिक़ राजनयिकों को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता है.
नई दिल्ली में एक विदेशी दूतावास के एक अधिकारी ने कहा, “अपने राजनयिक हितों का संरक्षण करना राजनयिकों और संबंधित देशों के ऊपर है, यह मेज़बान देश का काम नहीं है.”
मीडिया और पीड़ित परिवारों के दबाव के चलते भारत सरकार पर इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव है. सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने इतालवी नौसैनिकों को स्वदेश जाने का मौक़ा देकर बेवक़ूफ़ी की है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इटली ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करके इस विवाद की शुरुआत की थी.
इटली की होने के कारण कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी इस मामले में घसीटा जा रहा है.
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल का कहना है कि इटली के प्रधानमंत्री मारियो मोंटी ने हत्या के आरोपों का सामना कर रहे नौसैनिकों का स्वदेश लौटने पर विजेताओं जैसा स्वागत किया था जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया.
भारत का इनकार
गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था कि भारत ने वियना समझौते का उल्लंघन किया है.

सिबब्ल ने कहा कि इटली के राजदूत डेनियल मंचिनी ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफ़नामा दाख़िल कर इस मामले में पहल की थी. ऐसा करके इतालवी राजदूत ने ख़ुद ही भारतीय न्यायिक प्रणाली के अधिकार को स्वीकार किया था.
हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय वकील सिब्बल की इस राय से कितना इत्तेफ़ाक़ रखते हैं. लेकिन इटली ने अपने नौसैनिकों को वापस भेजने से मना कर दिया है. इटली का तर्क है कि उसके नौसैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में गोलियां चलाई थीं और ये मामला भारत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.
प्रभावित हो सकते है संबंध
दोनों देशों के बीच इस विवाद को बढ़ने से नहीं रोका गया तो इसके व्यापक परिणाम हो सकते है.
एक पश्चिमी राजनयिक ने कहा, “क्या होगा अगर इतालवी राजदूत देश से बाहर जाने की कोशिश करें? क्या उन्हें रोका जाएगा? और फिर उसके बाद क्या होगा?”
इस विवाद के कारण भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर चल रही वार्ता प्रभावित हो सकती है. इटली इस मामले में यूरोपीय संघ के अन्य देशों के समक्ष अपना पक्ष रहा है.
लेकिन सिब्बल ने चेताया कि अगर इटली को अपने दीर्घकालिक हितों की चिंता है तो उसे इस मुद्दे का हल खोजने की कोशिश करनी चाहिए.












