जानवर नहीं इंसान हूँ मैं : यासीन मलिक

कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने कहा है कि अफ़ज़ल गुरू की फाँसी के विरोध में इस्लामाबाद में 24 घंटे का अनशन करने के लिए अगर भारत सरकार उनका पासपोर्ट ज़ब्त करना चाहती है तो कर ले.
इस्लामाबाद से बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में यासीन मलिक ने कहा, "मैं कोई जानवर नहीं हूँ. मैं इंसान हूँ. सार्वजनिक जीवन है मेरा. मैं राजनीति में हूँ. कश्मीर में इतना बड़ा हादसा हो जाए और आप कहते हैं कि आप चुप बैठिए, आपको बोलने का हक़ नहीं है?"
उन्होंने कहा, "जेल मेरा दूसरा घर है. मैंने अपनी ज़िंदगी के दस साल जेलों में गुज़ारे हैं. आज अगर भारत सरकार मेरा पासपोर्ट ख़ारिज करना चाहती है और मेरे पहुँचते ही मुझे गिरफ़्तार करना और इंटेरोगेशन सेंटर ले जाना चाहती है तो ये उसकी इच्छा है. वो ये कर सकती है."
भारतीय संसद पर हमले की साज़िश में शामिल पाए गए अफ़ज़ल गुरू को फाँसी दिए जाने के ख़िलाफ़ यासीन मलिक ने इस्लामाबाद में चौबीस घंटे का अनशन किया था.
इस अनशन में लश्कर ए तैबा के संस्थापक बताए दाने वाले हफ़ीज़ सईद भी पहुँचे थे. उन्हें भारत 2006 में मुंबई पर हुए हमलों का मास्टरमाइंड मानता है.
विवाद
यासीन मलिक और हफ़ीज़ सईद एक ही मंच पर बैठे थे और उनकी ये तस्वीर अख़बारों में छपने के बाद भारत में हंगामा खड़ा हो गया.
भारतीय जनता पार्टी ने यासीन मलिक का पासपोर्ट ज़ब्त करने की माँग कर दी.
इस पर यासीन मलिक ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमें भारत सरकार ने 2005 में पासपोर्ट दिया था. वो पासपोर्ट राजनीतिक यात्रा के लिए दिया गया था क्योंकि पाकिस्तान से हमें राजनीतिक तौर पर आने का निमंत्रण मिला था. पहली रात को भारत सरकार ने ख़ुद पासपोर्ट हमारे घर पर पहुँचा दिया."
उन्होंने कहा कि अब अगर सरकार पासपोर्ट को ज़ब्त करना चाहती है तो कर ले. अगर वो हमें गिरफ़्तार करके इंटेरोगेशन सेंटर ले जाना चाहती है तो कर ले.
इस्लामाबाद में अनशन को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा, "लोगों को संतुष्ट करने के लिए एक बेगुनाह शख़्स को फाँसी चढ़ा दिया गया. क़ानून और संविधान का क़त्ल किया गया. उसके ख़िलाफ़ हमने यहाँ अहिंसक जनतांत्रिक विरोध किया चौबीस घंटे की भूख हड़ताल... मुझे उस पर मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं है. अगर उसके लिए मुझे जेल या इंटेरोगेशन सेंटर ले जाना चाहते हैं, ये उनकी इच्छा है."












