यौन अपराधों पर संसद का विशेष सत्र नहीं: शिंदे

विपक्षी राजनीतिक दलों की लगातार मांग के बावजूद केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार बलात्कार के मामलों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र नहीं बुलाएगी.
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने राज्य पुलिस प्रमुखों की दिल्ली में एक बैठक के बाद एक पत्रकार वार्ता में कहा, "इस तरह का सुझाव विपक्ष की नेता की ओर से आया था लेकिन इसकी अभी ज़रूरत नहीं है. इस बीच मैंने सभी राजनीतिक पार्टियों से कहा है कि वो इस मामले पर अपने सुझाव जस्टिस जेएस वर्मा समिति को भेजें."
सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान एक सवाल के जवाब में दिया था.
तीन सदस्यीय वर्मा समिति दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार मामले के बाद तैयार की गई है जो यौन अपराध से जुड़े मामलों पर अपनी राय सरकार को देगी.
महिला सुरक्षा और उससे जुड़े सवालों पर संसद के विशेष सत्र की मांग कांग्रेस की पूर्व सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस ने भी की थी.
दिल्ली में महिला पुलिस
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली में यौन अपराध से जुड़े मामलों के मद्देनज़र उन्होंने वित्त मंत्रालय को 2500 से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की बहाली के लिए प्रस्ताव भेजा है.
उन्होंने कहा कि इसके तहत राजधानी के लिए 418 सब-इंस्पेक्टर औरल 2088 कांस्टेबलों की बहाली होगी.

उनका कहना था कि इसके हिसाब से दिल्ली के सभी पुलिस स्टेशनों में दो सब-इंस्पेक्टरों और 10 कांस्टेबलों की बहाली होगी.
'अधिक ज़िम्मेदारी'
सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रमुखों से कहा कि उन्हें महिलाओं, बच्चों और दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर और अधिक ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि बैठक में यौन शोषण के मामलों में सज़ा को बढ़ाए जाने, पुलिस को और अधिक संवेदनशील बनाए जाने, ऐसे अपराधों में फंसे किशोरों की उम्र पर फिर से ग़ौर करने जैसे सुझाव आए हैं और इन सभी पर ग़ौर किया जाएगा.
हालांकि उन्होंने इन मामलों पर क़ानून में नया क़ानून लाने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी बस इतना कहा कि इसे जल्द से जल्द किया जाएगा.












