लोकायुक्त मामले पर मोदी की हार

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आरए मेहता को गुजरात का लोकायुक्त बनाए जाने को सही ठहराया है.
इस फैसले को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए झटका माना जा रहा था जो इस नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने मेहता को गुजरात का लोकायुक्त बनाए जाने के राज्यपाल कमला बेनीवाल के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है.
सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में मेहता की नियुक्ति को वैध करार दिया है.
अदालत ने कहा कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के काम करने के लिए बाध्य है लेकिन जस्टिस मेहता की नियुक्ति सही थी क्योंकि ये फैसला गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह के बाद लिया गया फैसला था.
लोकायुक्त पर तकरार
गुजरात सरकार इस नियुक्ति को गैर कानूनी बताती रही है क्योंकि इस बारे में राज्य सरकार की अनुमति नहीं ली गई थी. जस्टिस मेहता को अगस्त 2011 में गुजरात का लोकायुक्त बनाया गया था.
इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने भी मेहता की नियुक्ति को सही करार दिया था और मुख्यमंत्री मोदी की आलोचना की थी.
हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा था, “मुख्यंत्री इस भुलावे में काम कर रहे हैं कि वो मुख्य न्यायाधीश की श्रेष्ठता और प्रमुखता को अनदेखा कर सकते है जो बाध्यकारी है.”
अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल में लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव का प्रयास भी किया.
इस फैसले के बाद गुजरात सरकार ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की लेकिन उसे वहां से भी कोई राहत नहीं मिली.












