ये निकालते हैं ज़मीन से 'काला सोना'

ड्रिलिंग इंजीनियर यूसूफ़ कहते हैं कि इस पेशे में जानकारी के अलावा सटीक रणनीति बड़ी जरूरी है
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अनजान से लेकिन बेहद अहम क़िस्म के कामों को अंजाम दे रहे लोगों तक पहुंचने की अपनी कोशिश के तहत बीबीसी ने मुलाक़ात की ज्यूबलिएंट एनर्जी में ड्रिलिंग इंजीनियर सैयद यूसुफ़ रज़ा से.

यूसुफ़ से मिलने से पहले मुझे सिर्फ़ ये समझ आया कि वो एक क़िस्म के इंजीनियर है लेकिन करते क्या हैं इसकी कोई ख़बर नही थी.

बातचीत की शुरुआत इसी से हुई कि इंजीनियर बनना है, ये यूसुफ़ ने ख़ुद तय किया या पिताजी ने बेटे के पैदा होने पर तय कर लिया कि मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा.

फ़िज़िक्स में दिलचस्पी

इस पेशे को पूरी तरह अपनी पसंद बताते हुए यूसुफ़ ने बताया कि भौतिकशास्त्र यानी फ़िज़िक्स में दिलचस्पी ने उन्हें इस पेशे की ओर मोड़ा. यूसुफ़ बताते हैं कि वह आठवीं तक डॉक्टर बनने का ख़्वाब देखते थें लेकिन दसवीं तक आते-आते इरादा बदल गया.

यूसुफ़ बताते हैं कि उन्होंने भौतिक शास्त्र में ही करियर बनाने का इरादा किया, बारहवीं से ही इंजीनियरिंग की तैयारी की और की प्रवेश-परीक्षाएं दीं. रैंकिंग के हिसाब से इंडियन स्कूल ऑफ़ माइन्स में दाख़िला मिला और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

यूसुफ़ बताते हैं कि शुरू में उन्हे भी जानकारी नहीं थी कि पेट्रोलियम इंजीनियर के लिए क्या-क्या करियर विकल्प हो सकते हैं. बाद में उन्हें पता चला कि तेल और प्राकृतिक गैस कंपनियों के अलावा रिफ़ायनरी वगैरह में उनके लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं.

पेट्रोलियम इंजीनियरिंग करने वाले किसी युवा के पास कम से कम तीन तरह के विकल्प हो सकते हैं- रिज़र्वॉयर इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग और ड्रिलिंग इंजीनियरिंग.

क्या है ड्रिलिंग इंजीनियरिंग

एक विकल्प के तौर पर ड्रिलिंग इंजीनियरिंग को समझने की कोशिश करें तो ये पेशा क्या है.

इस सवाल के जवाब में यूसुफ़ स्पष्ट करते हैं कि मुख्य काम तेल कुओं की खुदाई की प्रक्रिया को पूरा करना है. शोध पर आधारित जानकारी के हिसाब से भूवैज्ञानिक बताते हैं कि ज़मीन के नीचे किस गहराई में तेल होने की गुंजाइश है.

इसी जानकारी के आधार पर ड्रिलिंग इंजीनियर को खुदाई का काम करवाना होता है. उसकी भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि खुदाई की पूरी प्रक्रिया उसकी बनाई योजना पर निर्भर करती है.

यहां तक कि इसमें लगने वाली ज़रूरी मशीनें भी उसे पता होनी चाहिए. फिर काम सही समय पर पूरा कराना भी उसी की ज़िम्मेदारी है.

चुनौतियां

यूसुफ़ बताते हैं कि इस पेशे में सही आकलन, योजना और चरणबद्ध तरीक़े से सही समय पर काम निपटाना बहुत चुनौतीपूर्ण है.

कई बार ऐसी आकस्मिक परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं कि उसका समाधान करना पूरी तरह आपकी अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा और समझ पर निर्भर करता है.

सुरक्षा का ख़्याल रखना भी बहुत ज़रूरी होता है. कई बार लोग महत्वाकांक्षा में बहकर छोटे रास्तों पर चलना चाहते हैं लेकिन उसका उल्टा नतीजा हो सकता है.

ड्रिलिंग इंजीनियर के तौर पर अपने करियर से संतुष्ट यूसुफ़ रज़ा कहते हैं कि इस क्षेत्र में क़दम रखने वालों के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं.