साल के बारह विवादास्पद बयान
बीते साल में कई बार ऐसे पल आए जब अच्छे-अच्छे लोगों की ज़ुबान फिसल गई. जुबान फिसलने के बाद उनके दिए बयान पर काफी हो-हल्ला भी मचा. अब जब साल बीत रहा है तो एक नज़र उन बयानों पर जिन्होंने भारतीय राजनीति में अचानक हंगामा पैदा कर दिया. बयान देने वालों को भी बाद में अफसोस जताना पड़ा. लेकिन उनका बयान तब तक इतिहास में दर्ज हो चुका था.
अन्ना हजारे
<bold>"एक ही मारा"</bold>

नागरिक आंदोलन के संघर्ष को एक नए मुकाम पर ले जाने वाले अन्ना हजारे वैसे तो कम बोलते हैं. नाप-तौल कर बोलते हैं. लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को जब एक शख्स ने थप्पड़ जड़ दिया तो पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना हजारे बोल पड़े. एक ही मारा. उन्होंने हमलावर के प्रति नरमी दिखाई और जिसकी बेहद आलोचना भी हुई.<bold/>
नितिन गडकरी
<bold>"घोड़ों को नहीं मिल रही है घास, गदहे खा रहे हैं च्यवनप्राश"</bold>

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के औराई विधानसभा इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की जुबान फिसली. इसमें उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि घोड़ों को नहीं मिल रही है घास, जबकि गदहे खा रहे हैं च्यवनप्राश.
गुलाम नबी आजाद
<bold>"समलैंगिकता अप्राकृतिक है और भारतीय समाज के लिए अच्छा नहीं है. यह दूसरे देशों से यहां पहुंची बीमारी है."</bold>
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने ये बयान नई दिल्ली में एचआईवी पर आयोजित सेमिनार में दिया. इस सेमिनार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं. लेकिन आजाद के बयान से पहले दोनों सेमिनार से जा चुके थे. हालांकि आजाद के इस बयान पर समलैंगिक अधिकारों की वकालत कर रहे लोगों ने भारी नाराजगी जताई.
सुशील कुमार शिंदे
<bold> "जिस तरह से देश बोफोर्स मामले को भूल गया उसी तरह कोयले का मुद्दा भी एक दिन भुला दिया जाएगा"</bold>
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के इस बयान पर विपक्ष ने जब काफी हंगामा मचाया तब जाकर शिंदे ने कहा कि उन्होंने ये बात मजाक में कही थी.
नरेंद्र मोदी

<bold>"इस देश में कभी किसी ने 50 करोड़ रुपये की गर्ल फ्रैंड देखी है."</bold>
गुजरात के मुख्यमंत्री ने ये बयान हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर पर टिप्पणी करते हुए दिया था.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
<bold> "ठीक है"</bold>
दिल्ली में सामूहिक बलात्कार मामले के गर्माने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने संदेश की वीडियो रिकॉर्डिंग पूरा होने के बाद पूछा 'ठीक है'. यह संदेश देश के तमाम समाचार चैनलों पर बिना संपादित ही चल गया. इन दो शब्दों के चलते सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री महोदय की काफी आलोचना हुई.
श्रीप्रकाश जायसवाल
<bold> "नई-नई जीत और नई-नई शादी, इसका अपना अलग महत्व होता है. जैसे-जैसे समय बीतेगा, जीत की यादें पुरानी होती जाएंगी. जैसे-जैसे समय बीतता है, पत्नी पुरानी हो जाती है."</bold>
भारतीय क्रिकेट टीम की टी-20 मैच में जीत के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते वक्त जायसवाल की जुबान फिसल गई. महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बयान देने के बाद जायसवाल को बाद में माफी मांगनी पड़ी.
राहुल गांधी

<bold>"पंजाब में प्रत्येक 10 में 7 लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं."</bold>
कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों का संबोधित करते हुए ये बयान दिया, जिसकी पंजाब के लोगों और नेताओं ने काफी आलोचना की.
नितिन गडकरी
<bold>"अगर साइंटिफिक भाषा में हम कहें तो दाऊद इब्राहिम और स्वामी विवेकानंद का आईक्यू लेवल एक समान था. लेकिन एक ने इसे गुंडागर्दी में लगाया और दूसरे ने इसे समाजसेवा में लगाया."</bold>
भोपाल के सार्वजनिक समारोह में नितिन गडकरी पुरुषों और महिलाओं के बीच होने वाले भेदभाव के मुद्दे पर बोल रहे थे. बोलते-बोलते वे आईक्यू लेवल तक पहुंचे और वहां उन्होंने दाऊद इब्राहिम और स्वामी विवेकानंद के बीच तुलना करते हुए एक समान बता दिया. उनकी मंशा चाहे जो रही हो लेकिन इस बयान पर भी हंगामा खूब हुआ.
बेनी प्रसाद वर्मा
<bold> "मुलायम सिंह पगला गए हैं, सठिया गए हैं, दिल्ली में सरकार बनाने का सपना पूरा नहीं होगा."</bold>
कांग्रेस सरकार में शामिल केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे मुलायम सिंह यादव के खिलाफ़ ये बातें तीसरे मोर्चे की संभावना पर कही. बेनी पहले समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

<bold>"पैसे पेड़ पर नहीं उगते"</bold>
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये बयान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ाने और रसोई गैस सिलिंडर पर सब्सिडी बंद करने की वजह बताते हुए दिया था. देश में एक के बाद एक सामने आने वाले घोटालों को देखते हुए प्रधानमंत्री के इस बयान की खूब आलोचना हुई.
ममता बनर्जी
<bold>"पहले लड़के-लड़कियां अगर एक दूसरे का हाथ पकड़ लेते थे तो उनके माता-पिता उन्हें पकड़ लेते थे, डांटते थे पर अब सब कुछ खुला है. खुले बाज़ार में खुले विकल्पों की तरह"</bold>
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती संख्याओं पर अपने फेसबुक पर ये टिप्पणी दर्ज की थी, उनकी इस टिप्पणी पर महिला संगठनों ने काफी आपत्ति जताई थी.












