स्वच्छ गंगा के लिए कारख़ाने होंगे बंद

उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी कुम्भ मेले के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों में औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए अभियान शुरू किया है.
पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के तहत प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली शराब और चमड़ा के लगभग सौ कारख़ानों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं.
कारखानों की बंदी का यह आदेश उत्तर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी किया है, जिसे क़ानूनन इस तरह की कार्यवाही का अधिकार प्राप्त है.
जिन सात शराब कारख़ानों को बंद करने का आदेश दिया गया है वे सभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, जिनका कचरा सहायक नदियों के ज़रिए गंगा में आता है.
ये हैं - बिजनौर की जैन डिस्टिलरी, मोहित पेट्रो कैम्प, अपर गैन्गेज सुगर मिल(डिस्टिलरी), नगलामल डिस्टलरी मेरठ, बरेली की सुपीरियर इंडस्ट्री एवं केसर इंटर प्राइजेज और शाहजहांपुर की मेसर्स यूनाइटेड स्पिरिट्स.
इनके अलावा प्रदूषण बोर्ड ने कानपुर और उन्नाव के अस्सी से अधिक चमड़ा कारख़ानों को बंद करने के आदेश दिए हैं.
प्रदूषण बोर्ड के सचिव जेएस यादव ने बताया कि कानपुर के कुछ चमड़ा कारख़ाने बंदी के आदेश का उल्लंघन करते पाए गए हैं.
सरकार ने इस अवहेलना के ख़िलाफ़ गंभीर रुख़ अपनाया है.
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने ज़िला मजिस्ट्रेटों को आदेश दिया है कि इन सभी कारख़ानों का निरीक्षण कराकर बंदी सुनिश्चित कराई जाए. इन कारख़ानों की बिजली काटने के आदेश भी दिए गए हैं.
बंदी आदेश का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा क़ायम कराकर गिरफ़्तारी का आदेश भी दिया गया है.
मुख्य सचिव ने उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों से बात करके उनसे भी प्रदूषण रोकने में सहयोग माँगा है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के कारख़ाने काली, हिंडन, राम गंगा और इनकी सहायक नदियों में अपनी गंदगी डालते हैं जो अंत में गंगा में ही आता है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कुम्भ के दौरान गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए कड़े आदेश दिए हैं. समझा जाता है कि साधू संतों, तीर्थ यात्रियों और हाईकोर्ट के डर से प्रदूषण बोर्ड और राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाई है.
मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वे कानपुर के जाजमऊ में चमड़ा कारख़ाने ट्रीटमेंट प्लांट्स का संचालन करें. इसके अलावा जल निगम भी सामूहिक शुद्धिकरण प्लांट ठीक से चलाएं.
टेहरी बांध से अतिरिक्त पानी
शहरी एवं औद्योगिक प्रदूषण के अलावा गंगा में पानी की कमी के कारण कई बार संगम पर गंगा का पानी काला दिखता है. कुम्भ के दौरान यह एक बड़ा संवेदनशील मुद्दा होता है. साधू संत धरना प्रदर्शन भी करते हैं.
हरिद्वार और नरोरा के बीच गंगा के पानी का अधिकांश भाग नहरों के ज़रिए सिंचाई और दिल्ली में पेयजल के लिए निकाल लिया जाता है. इस कारण नरोरा के नीचे गंगा में बहुत कम पानी रहता है.
इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कुम्भ के दौरान जनवरी से मार्च तक टेहरी बांध से गंगा में पर्याप्त पानी छोड़ने के लिए कहा है.
एक विज्ञप्ति के अनुसार जनवरी-फ़रवरी में टेहरी से 2500 क्यूसेक और मार्च में 1500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी गंगा में डाला जाएगा.












