आरक्षण की मांग पर दिल्ली को घेरेंगे जाट

राजस्थान के गूजर आंदोलन की आग अभी ठंडी नहीं पड़ी है कि हरियाणा के जाटों ने आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली घेरने के लिए कूच कर दिया है.
सर्वजाट खाप आरक्षण समिति और जाट आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े कई लोगों ने दिल्ली सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली को घेरने की घोषणा की है.
यूं तो हरियाणा सरकार ने बीते गुरुवार को जस्टिस केसी गुप्ता आयोग की एक रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है जिसमे जाटों व चार अन्य समुदायों को अलग से दस फ़ीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है.
लेकिन इन संगठनों ने हरियाणा की भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के इस फैसले को गंभीरता से लेने इनकार कर दिया है.
'दिल्ली घेरेंगे'
सर्वजाट आरक्षण समिति के नफे सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही स्थापित हो चुका है कि आरक्षण को 50 से ज़्यादा नहीं किया जा सकता. उनका कहना है कि राज्य में अनूसूचित जाती जनजाति के लिए पहले से 22 फ़ीसदी आरक्षण है इसके अलावा अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण है.
नफे सिंह का कहना है कि जाट यह चाहते हैं कि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण में जगह मिले. जाट आरक्षण संघर्ष समिति का दावा है कि उनके संगठन से जुड़े कार्यकर्ता रोहतक, हिसार, सिरसा, जींद और फतेहाबाद दिल्ली के बहादुरगढ़ की तरफ से आने वाले रास्तो को बंद करेगें. दूसरी तरफ अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत और सोनीपत के लोग दिल्ली की कुंडली सीमा पर धरना देंगे.
'भावनात्मक मुद्दा'
हरियाणा के एक वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्रि का कहना है कि "जिन भी संगठनों या नेताओं की अगुवाई में यह आंदोलन चलाया जा रहा है उनमे से कोई भी बहुत कद्दावर नहीं है लेकिन यह एक भावनात्मक मुद्दा है जिसकी वजह से इन्हें जाट बिरादरी के लोगों का समर्थन मिल सकता है."
अत्रि इस पूरे मुद्दे की विवेचना करते हुए कहते हैं कि "यह राज्य की कांग्रेस सरकार का जाट वोट बैंक में सेंध लगाने का एक और प्रयास है क्योंकि परंपरागत रूप से जाट लोकदल के साथ रहे हैं."
जाट हरियाणा में आबादी के दृष्टी से 22 करीब फीसदी है लेकिन सामाजिक और आर्थिंक रूप से उनका रूतबा और भी ज़्यादा है.
इंडियन नेशनल लोक दल के सुप्रीमो और राज्य के पूर्व ओम प्रकाश चौटाला जाट आरक्षण के मुद्दे पर मौन हैं और 'आर्थिक आधार पर आरक्षण' की मांग कर रहे हैं. अत्रि के अनुसार चौटाला की नज़र गैर जाट बिरादरियों के वोट बैंक पर है जो कि परंपरागत रूप से कांग्रेस के साथ रहा है.
राज्य में अन्य विपक्षी दल जैसे हरियाणा जनहित कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही खुल कर जाट आरक्षण के खिलाफ मैदान में हैं और अलग आंदोलन चलाने की बातें कर रहे हैं.












