भारत: खुले में पेशाब करने पर लगेगी पाबंदी?

भारत में आप कहीं चले जाइए, सार्वजनिक जगहों पर लोग आपको अक्सर पेशाब करते मिल जाएंगे.
राजस्थान में पिछले महीने कुछ स्वयंसेवकों ने इसे रोकने का एक अनोखा प्रयास किया. इन स्वयंसेवकों ने ढोल और सीटी बजाकर ऐसे लोगों को शर्मिंदा करना शुरू किया.
लेकिन कुछ लोग ये भी तर्क देते हैं कि देश में बड़ी संख्या में साफ-सुथरे शौचालयों की जरूरत है.
मुझे भारत आए अभी कुछ ही दिन हुए थे कि मेरे बेटे ने मेरे फ्लैट के पास की एक दीवार पर कुछ लोगों को पेशाब करते हुए मुझे दिखाया. सार्वजनिक स्थल पर पेशाब करते हुए वे लोग खूब हँस रहे थे और मज़ाक कर रहे थे.
मेरा बेटा कुछ समझ नहीं पा रहा था और मुझसे पूछ बैठा, “वे लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं?”
इस घटना को पांच साल हो गए हैं और उस सवाल का उत्तर मैं अभी भी तलाश रहा हूं.
राष्ट्रीय मनोरंजन
दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में घूमने पर आप ज्यादातर जगहों पर पुरुषों को जगह-जगह पेशाब करते और थूकते हुए देख सकते हैं.
हाल ही में मेरे एक भारतीय दोस्त ने मज़ाक में कहा कि ये तो राष्ट्रीय मनोरंजन है. उस मित्र ने बड़े गर्व से कहा, “हम कहीं भी ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं.”
राजस्थान में ऐसा करने वालों को अधिकारियों द्वारा शर्मिंदा करके रोकने की कोशिशों ने यहां एक बहस छेड़ दी है. देश के एक बड़े अंग्रेजी अखबार के एक स्तंभकार ने हाल ही में एक सवाल किया कि क्या भारतीय स्वाभाविक रूप से गंदे होते हैं.

उनका जवाब हां में था और बहुत से लोगों ने उनका समर्थन किया था.
एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले विक्रम ने इस सवाल पर सबसे पहले टिप्पणी की, “आप इस तरह का बेतुका सवाल कैसे पूछ सकते हैं? ”
जवाब बहुत आसान था. उन्होंने आगे कहा, “यहां पर्याप्त मात्रा में शौचालय नहीं हैं”
विक्रम ने एक सवाल उठाया था. भारत के ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने हाल ही में कहा था कि देश को मंदिरों से ज्यादा शौचालयों की जरूरत है.
इतने बड़े देश में लगभग आधे घरों में एक भी शौचालय नहीं हैं. रमेश के बयान का बड़ा विरोध हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उन्होंने महिलाओं से ये अपील कर डाली कि जब तक उनके ससुराल में शौचालय न हो, वे शादी न करें.
विक्रम की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली गई. ऐसा लगा जैसे कि ये बहस पूरी हो गई है.
लेकिन तभी टीना नाम की एक गृहिणी ने कहा, “ये बात सिर्फ शौचालयों के लिए ही नहीं है, ये हमारी तहजीब की कमी है.”
मैंने सोचा कि विक्रम इस पर कुछ टिप्पणी करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लेकिन मुंबई से मेरे एक दोस्त राजू ने सहमति में सिर हिलाया.












