'टाल देनी चाहिए थी कैश ट्रांसफ़र योजना'

कैश ट्रांसफ़र स्कीम पर केंद्र के स्पष्टीकरण के बाद चुनाव आयोग ने कहा है कि सरकार को ये फ़ैसला गुजरात चुनाव हो जाने तक टाल देना चाहिए था.
विपक्षी दल भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि सरकार की ग़रीबों के खातों में नकदी जमा करने की योजना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है.
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा, "आयोग का मत है कि आचार संहिता के जारी रहते की गई घोषणा को टाला जा सकता था. इसलिए आयोग ऐसी घोषणाओं पर चिंता जताता है और उम्मीद करता है कि ऐसे घोषणाओं से आचार संहिता के लागू रहते हुए बचना चाहिए.”
गुजरात में तेरह और सत्रह दिसंबर को मतदान होना है.
<link type="page"> <caption> चुनाव आयोग के फ़ैसले को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें</caption> <url href="http://eci.nic.in/eci_main1/current/Letter94122012.pdf" platform="highweb"/> </link>
गरीबों के खाते में सीधे नकदी जमा कराने की योजना एक अगले वर्ष एक जनवरी से देश 51 ज़िलों में शुरु होगी.
इन 51 ज़िलों में चार ज़िले गुजरात और दो ज़िले हिमाचल प्रदेश से हैं.
इस विषय पर आयोग ने कहा, “आयोग निर्देश देता है कि गुजरात के चार और हिमाचल प्रदेश के दो ज़िलों में इस योजना के क्रियान्वयन को, चुनाव प्रक्रिया के समाप्त होने तक स्थगित रखा जाए. ”
उधर सरकार अब भी चुनाव आयोग को की गई भाजपा की शिकायत पर चुटकी ले रही है.
सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी कहते रहे हैं कि भाजपा को शिकायत के बजाय, कैश ट्रांसफ़र योजना पर अपना रुख़ साफ़ करना चाहिए.












