क्या है आईटी कानून?

शिव सेना नेता बाल ठाकरे के निधन पर मुंबई में बंद के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी करने पर मुंबई की दो युवतियों की गिरफ्तारी से आईटी कानून और इसकी धाराओं पर बहस तेज हो गई है.
सिविल सोसायटी ही नहीं बल्कि सरकार के मंत्रियों ने भी इन गिरफ्तारियों की आलोचना की.
दूरसंचार और आईटी मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को शिक्षित करने की जरूरत है ताकि आईटी अधिनियम का दुरुपयोग न हो और इसे सही से लागू किया जाए.
क्या है कानून
आईटी कानून आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों के बीच होने वाली सूचना, जानकारी और आंकड़ों के आदान प्रदान पर लागू होता है.
इसी कानून में एक धारा है 66 ए जिसमें झूठे और आपत्तिजनक संदेश भेजने पर सजा का प्रावधान है.
इस धारा के तहत कंप्यूटर और संचार उपकरणों से ऐसे संदेश भेजने की मनाही है जिससे परेशानी, असुविधा, खतरा, विघ्न, अपमान, चोट, आपराधिक उकसावा, शत्रुता या दुर्भावना होती हो.

इसका उल्लंघन करने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.
कौन है दायरे में
कंप्यूटर इस्तेमाल के बढ़ते चलन और सोशल मीडिया के फैलते दायरे को देखते हुए आईटी अधिनियम की अहमियत खासी बढ़ गई है.
हाल के समय में कई ऐसे मौके आए जब सोशल मीडिया पर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ सरकार और सरकारी एजेंसियों को नागवार गुजरी है.
कई राजनेताओं और सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणियों को लेकर सरकार के भीतर सेंसरशिप की बातें चलती रही हैं, हालांकि तीखे विरोध के बीच सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है.
आप भी फेसबुक या ट्विटर इस्तेमाल करते होंगे, कुछ पोस्ट करते होंगे कुछ लाइक करते होंगे, तो इस तरह आप भी आईटी कानून के दायरे में आ जाते हैं.












