तेलंगाना समर्थकों ने मनाया विद्रोह दिवस

आंध्र प्रदेश में राज्य स्थापना की 57वां सालगिरह गुरूवार को कड़ी सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों के बीच मनाया जा रहा है.
लेकिन इसी समय अलग तेलंगना राज्य के समर्थकों ने हैदराबाद सहित तेलंगाना के कई ज़िलों में काले झंडे फहराकर 'विद्रोह दिवस' मनाया.
हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई और पुलिस ने छात्रों के विरुद्ध बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
छात्र जुलूस निकालना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं दी, इस पर क्रोधित छात्रों ने पुलिस पर पत्थर फेंके.
तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से विरोध प्रदर्शनों के आह्वान के मद्देनज़र हैदराबाद में एनटीआर स्टेडियम पर पुलिस ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे जहाँ सरकारी समारोह में मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने राष्ट्रीय झंडा फहराया.
पुलिस ने बिना पास के किसी व्यक्ति को वहां आने कि अनुमति नहीं दी और सड़कें बंद कर दीं थीं.
तेलंगाना क्षेत्र के कई मंत्रियों और कांग्रेसी नेताओं ने भी सरकारी समारोह का बहिष्कार किया.
'इमरजेंसी जैसे हालात'
संघर्ष समिति के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम को घर पर ही नज़रबंद कर दिया था.
कोदंडा राम ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तेलंगाना के लोगों को विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा की तेलंगाना में इमरजेंसी जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी गई है.
निज़ामाबाद में तेलंगाना के समर्थकों ने ज़िला कलेक्टर के कार्यालय पर काला झंडा फहराने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठी चार्ज किया.
करीमनगर में ज़िला कांग्रेस कार्यालय पर तेलंगाना समर्थकों ने काला झंडा लगाया. बाद में वहां पहुंचने वाली पुलिस ने लाठी चार्ज करके लोगों को हटाया.
दुसरे तेलंगाना ज़िलों से भी ऐसी ही घटनाओं की ख़बर मिली है.
हैदराबाद में तेलंगाना राष्ट्र समिति के कार्यालय पर भी पार्टी के नेता एन नरसिम्हा रेड्डी ने काला झंडा फहराकर "विद्रोह दिवस" मनाया.
उन्होंने कहा कि पार्टी पांच या छह नवंबर को अपने नए आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा करेगी.
तेलुगु देसम के कार्यालय पर राज्य स्थापना दिवस मनाया गया लेकिन तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं ने उसमें हिस्सा नहीं लिया.
वे भी अलग तेलंगाना राज्य की मांग कर रहे हैं.
1956 में तेलंगाना और तटीय आंध्र को मिला कर आंध्र प्रदेश बनाया गया था और तब ही से तेलंगाना के लोग उसका विरोध करते हुए अपने लिए एक अलग राज्य की मांग कर रहें हैं.












