क्या होगा कैप्टन अमरिंदर सिंह का?

- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, चंडीगढ से
पंजाब में चुनाव से पहले ही राहुल गाँधी ने एक जनसभा में कह दिया था कि अगर पार्टी चुनाव जीती तो पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री होंगे.
इस कदम से पता चलता है कि कांग्रेस को उन पर इतना भरोसा था कि पार्टी ने प्रदेश की राजनीति की परंपराओं की भी परवाह नहीं की.
टिकट से लेकर चुनाव प्रचार अमरिंदर सिंह को पूरी आजादी दी गई थी. यहां तक कि पिछली लोकसभा में हारने वाले उनके बेटे रणिंदर को भी टिकट दिया गया जो एक बार फिर हार गए.
जाहिर है कि अकाली दल-भाजपा की ऐतिहासिक जीत और कांग्रेस की हार से सबसे पहले उंगलियां भी अमरिंदर सिंह पर ही उठ रही हैं.
पार्टी की अप्रत्याशित हार के लिए उन्हें जिम्मेदार माना जा रहा है और खुद अमरिंदर ने भी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफे की पेशकश की है.
राजनीतिक करियर पर ग्रहण
ऐसी भी अटकलें लग रही हैं कि ये अमरिंदर के राजनीतिक करियर के अंत की शुरुआत हो सकती है. शायद अमरिंदर को भी इसका कुछ अहसास है.
हार के बाद अमरिंदर ने कहा, ''मैं कुछ दिनों में 70 वर्ष का हो रहा हूं और अगले पांच सालों में 75 का, ये वो उम्र है जब रिटायर हो जाना चाहिए.''
राजनीति में उनका भविष्य कैसा होगा, यह निर्भर करेगा कि हाईकमान उन्हें कितना जिम्मेदार मानता है.

पीछे मुड़कर देखें तो कांग्रेस की हार के कई कारण सामने आते हैं. अकालियों के लिए सकारात्मक वोट तो पड़ा ही, कांग्रेस की हार का बड़ा कारण यह था कि वो वोटर के मन को पढ़ नहीं पाए.
अमरिंदर सिंह उन तमाम लोगों में से थे जिनका मानना था कि पंजाब का वोटर हमेशा बदलाव के लिए वोट करता है.
इसके साथ ही हर वो वजह कांग्रेस के खिलाफ गई जिसकी बुनियाद पर वो मान रही थी कि नतीजा उसके हक में जाएगा.
बागियों की भूमिका
काफी लोग मानते थे कि मनप्रीत बादल की पंजाब पीपल्स पार्टी, उनके ताया प्रकाश सिंह बादल के अकाली दल का सबसे अधिक नुकसान करेगी.
इस पार्टी को पांच प्रतिशत से अधिक वोट मिले लेकिन चंडीगढ़ स्थित विकास और संचार संस्था के निदेशक प्रमोद कुमार कहते हैं, ''इसमें बहुत सारा वोट वो था जो सरकार के खिलाफ था और कांग्रेस को जाना चाहिए था. अंतिम परिणामों में ये बहुत अहम साबित हुआ.''
वे कहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी को मिले लगभग चार प्रतिशत वोट ने भी कांग्रेस के वोट काटे.
अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में पार्टी बागियों को संभालने में असफल रही जिससे नौ-दस सीटों पर नुकसान हुआ.
चुनाव से कुछ दिन पहले अमरिंदर ने बागियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ.
अमरिंदर सिंह की डेरा सच्चा सौदा से समर्थन की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया जब डेरा ने किसी पार्टी की बजाए उम्मीदवारों को समर्थन देना बेहतर समझा.
धीमें स्वरों में ही सही, लेकिन पार्टी नेता अमरिंदर के काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं. एक नेता से जब हार का कारण पूछा तो उन्होंने कहा, ''मैं क्या कहूं. जिन पर पार्टी ने भरोसा किया, वही इस का जवाब दें.''
हालांकि सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस के नेता कहते हैं कि हार की जिम्मेदारी पूरी पार्टी की बनती है.












