'कॉर्पोरेट भी हों सूचना अधिकार के दायरे में'

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कॉर्पोरेट और निजी क्षेत्र को भी सूचना के अधिकार क़ानून यानि आरटीआई के दायरे में लाने की वकालत की है.
दिल्ली में सूचना के अधिकार पर आयोजित छठे सम्मलेन को संबोधित करते हुए नितीश कुमार ने कहा कि वैसे तो आरटीआई सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित करता है लेकिन सभी क्षेत्रों को इसके दायरे में लाने के बाद ही आम आदमी को इसका पूरा लाभ मिल सकेगा.
बिहार के मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आवयश्क सेवाओं के अधिकार के सिलसिले में एक राष्ट्रीय क़ानून बनाया जाए.
नितीश कुमार के मुताबिक़ इस क़दम से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी.
नितीश कुमार ने कहा, "बिहार में भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए सूचना के अधिकार को हथियार के रूप में इस्तमाल किया जा रहा है. इसी क़ानून के चलते बिहार देश का पहला राज्य बना है जिसमे मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री और अफ़सरों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया है."
आरटीआई पर बहस
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को आरटीआई क़ानून की समीक्षा करने की बात कही थी.
मनमोहन सिंह ने कहा था कि सूचना के अधिकार का क़ानून प्रभावी हुआ है, लेकिन इसे लेकर कुछ चिंताएं हैं कि यह ईमानदार और नेक नीयत वाले नौकरशाहों को खुलकर अपनी राय देने में हतोत्साहित कर सकता है.
लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि निर्धारित समय में सूचना जारी करने और सार्वजनिक कार्यों में लगे अधिकारियों को मुहैया संसाधनों के बीच एक संतुलन स्थापित करवाया जाना भी ज़रूरी है.
प्रधानमंत्री के इस बयान के एक दिन बाद ही सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा था कि 'प्रधानमंत्री या किसी अन्य द्वारा' आरटीआई का़नून को कमज़ोर करने के प्रयासों का हर क़ीमत पर विरोध होना चाहिए.












