आईपीएस संजीव भट्ट निलंबित

संजीव भट्ट( फ़ाईल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, राज्य सरकार ने कुछ दिनों पहले संजीव भट्ट को मिली सुरक्षा को हटाने का फ़ैसला किया था.

सुप्रीम कोर्ट में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हलफ़नामा दायर करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है.

सोमवार देर रात राज्य सरकार ने छह पन्ने के निलंबन पत्र में उन पर बिना छुट्टी के ग़ायब रहने, विभागीय जाँच समिति के सामने पेश नहीं होने और सरकारी गाड़ी के ग़लत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ये फ़ैसला किया.

बीबीसी से बातचीत के दौरान संजीव भट्ट ने अपने निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य सरकार उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह नहीं चाहती कि कोई भी व्यक्ति राज्य में 2002 में हुए दंगों के मामले में सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाए.

संजीव भट्ट का कहना था, ''बड़ी सीधी सी बात है कि पिछले दस वर्षों से गुजरात में ऐसा माहौल खड़ा करके रखा है कि कोई भी गवाह या अधिकारी इनके ख़िलाफ़ गवाही ना दे, कोई सच ना बोले ताकि ये 2002 में और उसके बाद जो काम करते आए हैं वह बाहर ना आए और किसी कोर्ट में साबित ना हो सके. जब भी कोई गवाह सर उठाने की कोशिश करता है राज्य सरकार यही चाहती है कि उसका सर क़लम कर दिया जाए ताकि वह तो कुछ ना बोले लेकिन दूसरे अधिकारियों को भी सीधा सा संदेश चला जाए कि जो भी सर उठाएगा उसका यही हाल होगा.''

इसके अलावा राज्य के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ने उन पर उनके निजी ई-मेल को हैक करने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया था.

पिछले हफ़्ते संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर किया था.

हलफ़नामा

अपने हलफ़नामें में संजीव भट्ट ने कहा है कि 2002 दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच रिपोर्ट को राज्य के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल तुषार मेहता को लीक कर दी गई थी.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि तुषार मेहता ने ये एसआईटी की ई-मेल को संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता एस गुरूमूर्ति को भेजा था.

हलफ़नामे के अनुसार बाद में इस मेल को गुरूमूर्ति ने वकील रामजेठमलानी और उनके पुत्र महेश जेठमलानी को भेजा दिया था.

ग़ौरतलब है कि रामजेठमलानी गुजरात से ही भाजपा के राज्य सभा सांसद हैं और वह तथा उनके वकील पुत्र महेश जेठमलानी गुजरात दंगों से जुड़े कई मामलों और पूर्व गृह मंत्री अमित शाह के वकील हैं.

पिछले कुछ महीनों से संजीव भट्ट और गुजरात सरकार के बीच टकराव चल रहा है.

इसी साल मार्च के महीने में संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर कर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27 फ़रवरी, 2002 की शाम में मुख्यमंत्री की आवास पर हुई बैठक में वे मौजूद थे, जिसमें मोदी ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना ग़ुस्सा उतारने का मौक़ा दिया जाना चाहिए.