भारत का एनएचआरसी मूक दर्शक: ह्यूमन राइट्स वॉच

160 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट
इमेज कैप्शन, 160 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत में वर्ष 2008 में तीन जगहों पर हुए बम धमाकों पर बनाई गई अपनी रिपोर्ट में भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कड़ी आलोचना की है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है, "सरकारी संस्था एनएचआरसी ने आतंकवादी घटनाओं के संदिग्धों की शिकायतों पर ढुलमुल रवैया अपनाया है. सबसे स्पष्ट उदाहरण बटला हाऊस मुठभेड़ में एनएचआरसी की जाँच का है. इस मामले में एनएचआरसी के अपने आदेश का उल्लंघन हुआ जिसके तहत सभी मुठभेड़ों की जाँच होनी चाहिए."

उनका कहना है, "दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर एनएचआरसी ने बटला हाउस मुठभेड़ की जाँच की और केवल पुलिस के पक्ष पर आधारित रिपोर्ट में पुलिस को निर्दोष करार दे दिया. इस मामले में एक नई गंभीर जाँच होनी चाहिए."

ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया मामलों की निदेशक मीनाक्षी गांगुली का कहना है, "जहाँ तक आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के दौरान दुर्व्यवहार की बात है राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग केवल मूक दर्शक बनकर रह गया है."

'द एंटीनेशनल्स'

ह्यूमन राइट्स वॉच ने वर्ष 2008 में जयपुर, अहमदाबाद और नई दिल्ली में हुए बम धमाकों के बाद के घटनाक्रम पर 'द एंटीनेशनल्स' शीर्षक से रिपोर्ट बनाई है. इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी.

इस संस्था ने 160 लोगों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है और जिन लोगों से बात की गई है उनमें दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संदिग्ध लोग, उनके परिजन, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारतीय अधिकारियों ने 2008 में हुए बम विस्फोटों की जाँच में आतंकवाद विरोधी दस्तों ने अनेक मुसलमान पुरुषों से पूछताछ की, उन्हें 'एंटी-नेशनल' यानी देशद्रोही करार दे दिया और अंतत: नौ राज्यों के 70 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किए.

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने संदिग्धों को पकड़ने के बाद हफ़्तों तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं दिखाई ताकि वे पहले दोष स्वीकार कर लें, इनमें से कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रताड़ित किया गया, आखों पर पट्टी बांधकर रखा गया, उनकी पिटाई की गई, कोरे काग़ज़ पर हस्ताक्षर कराए गए और उनके परिजनों को धमकाया गया.

ह्यूमन राइट्स वॉच का भी कहना है कि भारत सरकार को जल्द ही न्याय प्रणाली में सुधार करना चाहिए ताकि दोबारा मानवाधिकारों का हनन न हो.

मीनाक्षी गांगुली का कहना है, "वर्ष 2008 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में संदिग्धों के साथ हिरासत में हर स्तर पर दुर्व्यवहार हुआ, पुलिस थाने से लेकर जेल तक. मजिस्ट्रेटों ने इनकी शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया...हमें ऐसा होने की संभावना चीन में दिखाई देती है. विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र (भारत), इससे कहीं बेहतर कर सकता है."

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि पुलिस को अब पता चल चुका है कि मालेगाँव बम विस्फोट के लिए हिंदू चरमपंथी शामिल है, इसलिए मालेगाँव बम विस्फोट के सिलसिले में पकड़े गए नौ मुस्लिम नौजवानों के मामले में जल्द से जल्द एक निष्पक्ष जाँच करवाई जाए.