गूजरों से बातचीत खटाई में

आंदोलनकारी
    • Author, नारायण बारेठ
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर

राजस्थान में गूजर नेताओं और सरकार के बीच बातचीत फिर खटाई में पड़ गई है.

गूजर नेताओं ने पहले सरकार से बातचीत के लिए अपना 21 सदस्यों का दल जयपुर भेजने का ऐलान किया मगर शाम ढलते-ढलते वे पीछे हट गए.

उनका कहना है कि पहले सतारूढ़ कांग्रेस के नेता सरकार से बात करें इसके बाद ही आंदोलनकारी सरकार से बात करेंगे.

गूजर अपनी बिरादरी के लिए सरकारी नौकरियों में पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं.

उन्होंने पिछले 12 दिनों से दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग को जाम कर रखा है. हालांकि उन्होंने कुछ और जगह रेल और सड़क यातायात को रोका था लेकिन अब वहाँ से हट गए हैं.

वे दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग से हटने को तैयार नहीं है.

पीछे हटे

इससे पूर्व गुरुवार को गूजर नेता बातचीत के लिए टेबल पर आए थे और भरतपुर के एक गाँव में सरकार के प्रतिनिधियों से दो घंटे तक बातचीत की थी.

ये गाँव दिल्ली-मुंबई रेल लाइन के निकट है जहाँ गूजर पिछले दस दिन से रेल पटरियों रेल मार्ग को रोके बैठे हैं.

गूजर नेताओं ने दूसरे दौर की गुरुवार को हुई बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि अब शुक्रवार को तीसरे दौर की बातचीत जयपुर में होगी.

गूजर नेताओं की इस घोषणा के बाद सरकार जयपुर में बातचीत के लिए मेज़ सजा कर बैठ गई मगर शाम ढलते ढलते गूजर नेता बातचीत से पीछे हट गए.

इस गूजर आन्दोलन के प्रवक्ता डॉ रूप सिंह ने बीबीसी को बताया, "समुदाय चाहता है कि कांग्रेस के गूजर नेता सचिन पायलट और राज्य सरकार में शामिल ऊर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह पहले सरकार से बात कर हमें भरोसा दिलाएँ कि आरक्षण की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी. इसके बाद ही गूजर अपना दल बातचीत के लिए जयपुर भेजेंगे."

उर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह खुद गूजर समुदाय से हैं और पिछले दिनों रेल पटरी पर बैठे गूजर समुदाय के लोगों से मौके पर जाकर मिले थे.

इस दौरान ज्यादातर स्थानों पर रेल और सडक मार्गो पर यातायात शुरू हो गया है.

लेकिन दिल्ली मुंबई रेल मार्ग को आंदोलनकारी छोड़ने को तैयार नहीं हैं. इस मार्ग की रेलगाड़ियों को दूसरे मार्ग से भेजा जा रहा है.