खुशबू के सेक्स मुकदमे ख़त्म

सुप्रीम कोर्ट ने तमिल और हिंदी फ़िल्मों की अभिनेत्री खुशबू को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज सभी 22 मामलों को निरस्त कर दिया है.
खुशबू ने 2005 में विवाह पूर्व यौन संबंध को लेकर एक बयान दिया था. इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था.
उस समय तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने खुशबू के बयान को तमिल संस्कृति के ख़िलाफ़ बताया था.
विवाद की जड़
खुशबू ने सितंबर 2005 में एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था कि महानगरों की लड़कियाँ अब यौन इच्छाओं को दबाती नहीं हैं. इस बारे में उनके विचार खुले हुए हैं.
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया था कि यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए और माता-पिता को इसकी शिक्षा देनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए खुशबू के खिलाफ सभी 22 मामलों को खारिज कर दिया.
इस फैसले के बाद एक निजी समाचार चैनल से कहा, ''मेरे शब्दों और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मेरे विश्वास की पुष्टि हुई है.''
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनने के बाद वह स्वयं को चिंतामुक्त महसूस कर रही हैं.
खशबू ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने के लिए अप्रैल 2008 में मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसे रद्द कर दिया गया था.
इसके बाद खुशबू ने अपने खिलाफ दायर सभी मामलों को फ़र्जी और परेशान करने वाला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी. उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों पर रोक लगा दी थी.












